भारत में पहली बार: चेनानी-नशरी सुरंग मार्ग में यात्रियों को मिलेगी ताजी हवा

नई दिल्ली ( 1 अप्रैल ): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार ( दो अप्रैल) को भारत की सबसे बड़ी हाईवे सुरंग का उद्घाटन करेंगे। जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (नेशनल हाईवे) पर स्थित ये सुरंग 9.28 किलोमीटर लंबी है। ये सुरंग जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के चेनानी को रामबन जिले के नशरी से जोड़ती है।

इस टनल में दो समानातंर ट्यूब हैं। प्रवेश सिरे का व्यास 13 मीटर है और सुरक्षा ट्यूब जिसे निकास द्वार भी कहते हैं, का व्यास 6 मीटर है। दोनों ट्यूब में 29 जगहों पर क्रास पैसेज हैं। मुख्य ट्यूब में हर 8 मीटर पर ताजा हवा के लिए इनलेट बनाए गए हैं। हवा बाहर जाने के लिए हर 100 मीटर पर आउटलेट बनाए गए हैं।

आईएलएंडएफएस के प्रोजेक्ट डायरेक्टर जेएस राठौर ने के मुताबिक चेनानी-नशरी सुरंग भारत की पहली और दुनिया की छठी ऐसी सुरंग है जिसमें वायु संचरण के लिए ट्रांसवर्स वेंटिलेशन सिस्टम लगा हुआ है।

ट्रांसवर्स वेंटिलेशन सिस्टम से वाहनों का धुआं सुरंग के अंदर न्यूनतम स्तर तक रहेगा। इस तकनीकी के वजह से सुरंग के अंदर यात्रियों को घुटन नहीं महसूस होगी। राठौर ने बताया है कि इस टनल के मुख्य ट्यूब में किसी यात्री को कोई समस्या आने पर वो क्रास पैसेज का इस्तेमाल करके सुरक्षा ट्यूब में जा सकता है। सुरक्षा के मद्देनजर इस टनल में कुल 124 कैमरे लगे हुए हैं। टनल में लीनियर हीट डिटेक्शन सिस्टम लगा हुआ जो सुरंग के अंदर का तापमान बदलते ही इंटीग्रेटेड टनेल कंट्रोल रूम (आईटीसीआर) को तुरंत सूचना देगा, ये चिंताजनक हालात में टनल के अंदर मौजूद कर्मचारियों से संपर्क करके समस्या का निदान करेगा।

टनल में हर 150 मीटर पर एसओएस बॉक्स लगें हैं। आपातकालीन स्थिति में यात्री इनका इस्तेमाल हॉट लाइन की तरह कर सकेंगे। आईटीसीआर से मदद पाने के लिए यात्रियों को एसओएस बॉक्स खोलकर बस “हलो” बोलना होगा। राठौर ने बताया कि इन एसओएस बॉक्स में फर्स्टएड का सामान और कुछ जरूरी दवाएं भी होंगी। टनल के अंदर यात्री अपने फोन इस्तेमाल कर सकेंगे। राठौर ने बताया कि बीएसएनएल, एयरटेल और आइडिया ने सही सिग्नल उपलब्ध कराने के लिए टनल के अंदर विशेष उपकरण लगाए हैं।

टनल से निकलते या घुसते समय रोशनी अचानक बढ़ने या खत्म हो जाने से चालकों की दृष्टि बाधित न हो इसके लिए विशेष प्रकाश व्यवस्था की गयी है। टनल में फायर सेफ्टी का भी विशेष ध्यान रखा गया है। आग लगते ही सुरंग में लगे फायर सेंसर हरकत में आ जाएंगे और सुरंग में ताजा हवा आनी बंद हो जाएगी और एग्झास्ट चलने लगेगा। टनल में हर 300 मीटर पर एग्झास्ट लगे हैं और आग लगने की जगह के आसपास स्थित एग्झास्ट तेजी से काम करने लगेंगे और धुएं को टनल से बाहर निकाल देंगे।