अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना

कश्मीर (1 जुलाई): अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना हो गया है। भक्तों में भारी जोश है। बम बम भोले के नारे के साथ महादेव के भक्त अमरनाथ यात्रा पर रवाना हो गए। जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने झंडी दिखाकर यात्रा की शुरुआत की। पहले जत्थे में 150 यात्री शामिल हैं।

बता दें कि अमनाथ यात्रा पर इस बार आतंक का खतरा ज्यादा है। पंपोर में हुए आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियां कोई भी मौका नहीं छोड़ रही है। आज गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी जम्मू कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेंगे। अगले दो दिनों तक राजनाथ सिंह अमरनाथ से लेकर राज्य की सुरक्षा की समीक्षा करेंगे।

हालांकि इस बार बाबा बर्फानी की शिवलिंग महज 4 फीट की बनी है। शिवलिंग के आकार को देख कर अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस बार बाबा बर्फानी के दर्शन भक्तों को मुश्किल से ही हो पाएंगे। यात्रा के खत्म होने से पहले ही ये शिवलिंग पुरी तरह से पिघल सकता है। 

छोटे शिवलिंग के बावजूद देशभर से श्रद्धालु जम्मू पहुंच रहे हैं। वहीं खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक इस बार बाबा बर्फानी की यात्रा पर आतंकी खतरा कुछ ज्यादा है। हाल में हुए आतंकी हमले इसकी ओर इशारा भी करते हैं।

आईबी की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल की शुरुआत से ही वादी में घुसपैठ बढ़ी है। बताया जा रहा है कि इन आतंकियों के निशाने पर अमरनाथ यात्री हैं। जिसके बाद गृह मंत्रालय की तीन सदस्यीय टीम श्रीनगर में मौजूद है। इस बार अमरनाथ यात्रियों को तीन स्तर की सुरक्षा देने का फैसला किया गया है। ताकि पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर आतंकी किसी भी हाल में बाबा बर्फानी के भक्तो को ना निशाना बना सकें। 

सुरक्षा बलों को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि अमरनाथ पहुंचने के लिए भक्तों को पंपोर से गुज़रना होगा। जहां हाल ही में आठ जवान शहीद हुए हैं। इस हमले ने केंद्र सरकार को भी परेशान करके रख दिया है। जिसके बाद आज गृह मंत्री राजनाथ सिंह दो दिनों की यात्रा पर जम्मू कश्मीर आ रहे हैं।

राजनाथ अपनी इस यात्रा में पूरे राज्य की सुरक्षा का जायजा लेंगे। साथ ही अमरनाथ यात्रा की तैयारियों की भी वो समीक्षा करेंगे। वो पवित्र गुफा के दर्शन भी करेंगे। सुरक्षा को लेकर हो रही इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, सेना और सेना के आला अफसर शामिल होंगे। माना जा रहा है कि घुसपैठ रोकने के लिए की जा रही कोशिशों के बारे में राजनाथ को बताया जाएगा।

तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमरनाथ यात्रा के दो मार्गों पर 12,500 केन्द्रीय अर्धसैनिक बल और और राज्य पुलिस के 8000 पुलिसवाले तैनात किए जा रहे हैं। ताकि आतंकवादी अपने मंसूबों में कामयाब न हो पाएं।