दर्दनाक हादसे के बाद केरल में फिर हुई जमकर आतिशबाजी

कोल्लम (18 अप्रैल): केरल में मशहूर त्रिशूर पूरम उत्सव का आगाज हो गया है। कोल्लम के पुत्तिंगल मंदिर में आतिशबाजियों के कारण हुए दर्दनाक हादसे के बावजूद सरकार और हाईकोर्ट की अनुमति से इसकी शुरुआत चौंधिया देने वाली आतिशाबजी से हुई। हालांकि कोल्लम मंदिर की त्रासदी को ध्यान में रखते हुए केरल उच्च न्यायालय ने सुरक्षा के मद्देनजर कड़े निर्देश भी जारी किए हैं।

त्रिशूर पूरम उत्सव की आतिशबाजी की शान पूरी दुनिया में मशहूर है। जहां अलग-अलग मंदिरों के श्रद्धालुओं के बीच आतिशबाजी का मुकाबला होता है। उत्सव की शुरुआत  17 अप्रैल को सुबह तीन बजे से  हो गई। भांति-भांति की आतिशबाजियों की आकर्षक और चौंधिया देनेवाली रौशनी से त्रिशूर का आसमान जगमगा उठा। ये केरल के नगर त्रिशूर का एक सामाजिक और धार्मिक उत्सव है, जो आठ दिनों तक चलता है। 

गीत-संगीत और नृत्य के साथ सुसज्जित हाथियों का प्रदर्शन किया गया। हर मंदिर को 15 हाथियों को प्रदर्शित करने की अनुमति दी गई थी। हर मंदिर के लोग इस जुगत में रहते हैं कि उसे दक्षिण भारत में सबसे बेहतरीन हाथी और छतरी रखने का ईनाम मिले।

कोल्लम के पुत्तिंगल देवी मंदिर में आतिशबाजी के दौरान भीषण आग लगने की वजह से हुए भयानक हादसे के मद्देनजर इस साल के इस उत्सव में कड़ी सुरक्षा रखी गई।