फिल्म ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’ रिलीज के लिए तैयार, एक अर्दली ऐसे बना महरानी का सबसे करीबी


मुंबई (5 जून): एक नौजवान भारतीय अर्दली को 1887 में महारानी विक्टोरिया के शासन के स्वर्ण जयंती समारोह के समय उनके दरबार में सेवा करने के लिए इंग्लैंड लाया गया।


‘लंबे और गंभीर’ अब्दुल करीम में कुछ ऐसा था जिसे महारानी की आंखों ने पकड़ लिया। तब वह सिर्फ 26 साल का था और महारानी अपनी उम्र के छठे दशक के आखिर में थीं।


 जब उसे महारानी के सामने पेश किया गया तब उसने उनके पैरों को चूम लिया। कुछ दिन बाद उसने महारानी को शानदार भारतीय व्यंजन तैयार कर चखाया तब वह भी आश्चर्यचकित हो गईं।


करीम कम समय में ही महारानी का पसंदीदा बन गया, तब उसे खाने की मेज पर प्रतीक्षा करने के काम से हटाकर ‘मुंशी’ बनाया गया। उसने रानी को हिंदुस्तानी भाषा सिखाई तथा भारत से जुड़े मामलों पर उनके साथ अपनी राय साझा की और महारानी का सबसे करीबी भरोसेमंद बन गया।


आपको बता दें कि दोनों के बीच की यह दोस्ती महारानी विक्टोरिया के दरबारियों और उनके बच्चों को नागवार गुजरने लगी थी। 1901 में जब उनका निधन हुआ तब उसके के बाद उनके बेटे किंग एडवर्ड VII ने महारानी और उनके मुंशी के बीच पत्राचार की सभी निशानियों को नष्ट कर दिया, साथ ही अब्दुल करीम को भारत वापस भेज दिया गया।


पत्रकार और लेखक श्राबणी बसु ने महारानी विक्टोरिया और अब्दुल के बीच पत्राचार के अवशेषों तथा महारानी के 'हिंदुस्तानी जर्नल' और बाद में लंबे समय से छिपी हुई अब्दुल करीम की डायरी को काफी मशक्कत से खोजकर इस बेमेल दोस्ती की छवि को फिर से जिंदा करने की कोशिश की है।


 2010 में ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल: द ट्रू स्टोरी ऑफ द क्वीन्स क्लोजेस्ट कॉन्फिडेंट’ के नाम से प्रकाशित हुई। इस किताब पर अब स्टीफन फ्रीर्स ने फिल्म बनाई है। इसमें डेम जुडी डेंच ने महारानी और अली फजल ने अब्दुल करीम की भूमिका निभाई है।


इसी महीने जारी इसके ट्रेलर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसे 70वें कान फिल्म समारोह में लॉन्च किया जाना था लेकिन फिल्म के निर्माताओं ने मैनचेस्टर आतंकवादी हमले की वजह से इसे स्थगित करने का ले लिया, ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’ सितंबर 2017 में रिलीज के लिए तैयार है।