अमेरिका में रह रहा है तुर्की के तख्‍तापलट की साजिश का जिम्मेदार गुलेन

नई दिल्ली(16 जुलाई): तुर्की में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के तख्तापलट की बड़ी साजिश छह घंटे चले तमाशे के बाद नाकाम हो गई है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान ने इस्तांबुल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस तख्तालपट की कोशिश को मुस्‍लिक मौलवी फतेउल्‍लाह गुलेन के समर्थकों की साजिश करार दिया।

जानिये गुलेन के बारे में यह बातें... 

फिलहाल यह पेन्‍सलवेनिया में निर्वासित जीवन जी रहा है। वह एक प्रशिक्षित इमाम है। वह 50 साल पहले तुर्की में उस वक्‍त चर्चा में आया था, जब उसने इस्‍लाम के रहस्‍यमयी रूप दर्शन के साथ लोकतंत्र, विज्ञान, शिक्षा को बढ़ावा देना शुरू किया था।

उसके समर्थकों ने 100 से अधिक देशों में 1000 स्‍कूलों को शुरू किया। इनमें से 150 से अधिक स्‍कूल्‍स अमेरिका और तुर्की में करदाताओं के पैसों से चल रहे हैं। इसके अलावा वह यूनिवर्सिटी, हॉस्पिटल, च‍ैरिटी, एक बैंक और बड़े पैमाने पर मीडिया अंपायर चला रहा है, जिसमें अखबार, रेडियो और टीवी चैनल शामिल हैं।

तुर्की के राष्‍ट्रपति रेसिप तेयेप एर्दोगान लंबे समय से गुलेन पर आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि वह न्‍सलवेनिया के पोकोनो माउंटेन में 26 एकड़ के कपांउड में बैकठकर आधिकारिक रूप से चुनी गई तुर्की की धर्मनिरपेक्ष सरकार को उखाड़ फेंकने की योजना बना रहा है। 

वह कभी-कभार ही सार्वजनिक रूप से देखा जाता है और उसकी अनुपस्थिति में कम से कम तीन पर उस पर ट्रायल चल चुका है। अमेरिका ने गुलेन को वापस तुर्की भेजने के मामले में थोड़ा रुझान दिखाया है। हालांकि, न्याय विभाग ने गुलेन के मामले पर टिप्पणी करने से मना कर दिया है। 

पिछले महीने तुर्की सरकार का प्रतिनिधित्‍व करने वाले वकीलों ने कहा कि वह गुलेन के गैरकानूनी कामों को उजाकर करना जारी रखेंगे। इसके एक दिन पहले ही पेन्‍सलवेनिया के स्‍क्रैंटन में फेडरल जज ने मौलवी के खिलाफ लगाए गए मुकदमे को खारिज कर दिया था। 

वकील रॉबर्ट एम्सटर्डम ने इस फैसले के परिणाम के बावजूद कहा था कि गुलेन और पोकोनॉस में बैठे उसके सह षड्यंत्रकारियों के लिए यह बहुत ही स्पष्ट संदेश है कि उनके पास दंड से बचने के गिने चुने दिन बाकी हैं। उन्‍होंने कहा था कि गुलेन के गैरकानूनी आचरण को सामने लाया जाएगा। 

वित्‍तीय अन‍ियमितताओं और वीजा जालसाजी के आरोपों के बीच गुलेन के द्वारा चलाए जा रहे कुछ स्‍कूलों की जांच एफबीआई के अधिकारियों ने की। इनमें से सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि स्‍कूल तुर्की से टीचरों को बुला रहा है, ताकि वे प्रभावित छात्रों की पहचान कर सकें और उन्‍हें गुलेन के मूवमेंट से जोड़ने के लिए राजी कर सकें।