एक ऐसा समुदाय जहां मां-बाप खुद खोजते हैं बेटी के लिए ग्राहक

भोपाल (25 जून): जब कभी महिलाओं के हक और अधिकार की बात भी होती है तो उन्हें कागजों में मिली आजादी को सामने रखकर शसक्त और मजबूत बता दिया जाता है। लेकिन भारत में ऐसे कई इलाके हैं जहां महिलाएं अभी भी परंपरा के नाम पर नर्क का जीवन व्यतीत करने पर मजबूर हैं। इसकी एक झलक मध्य प्रदेश में नीमच, मन्दसौर और रतलाम के इलाकों में देखने को मिलता है।

यहां महिलाएं उन्हें जन्म देने वाले मां-बाप के हाथों बिकने पर मजबूर हैं। कहा जाता है कि यहां के गांवों में सेक्स को सामाजिक मान्यता मिली हुई है और इस काम के लिए मां-बाप को किसी प्रकार का एतराज नहीं होता। ये हालत उस देश के महिलाओं की है जहां राष्ट्रपति से लेकर कई राज्यों में सीएम पद पाकर महिलाएं अपनी कामयाबी का झंडा गाड़ चुकी हैं। यह कहानी है उस देश की जहां माटी को माता और बेटी को लक्ष्मी का रूप माना जाता है।

200 सालों से चली आ रही परंपरा यह कहानी बांछड़ा समुदाय में पलने वाली लड़कियों की। कहा जाता है कि इस समुदाय की लड़कियां पिछले 200 सालों से सेक्स के धंधे से अपने परिवार का पेट पालती आ रही हैं। मालवा में करीब 70 गांवों में जिस्मफरोशी की करीब 250 मंडियां हैं, जहां खुलेआम परिवार के सदस्य ही बेटी के जिस्म का सौदा करते है।

शाम होते ही इस समुदाय के मुखिया यानी लड़कियों के मां-बाप अपनी बेटियों के लिए ग्राहक खोजना शुरू कर देते हैं। सड़क किनारे बैठकर ये लोग एक साथ अपनी ही बेटियों के लिए कीमत लगाने के लिए लोगों का इंतजार करते हैं। इस समुदाय में अगर किसी लड़के को शादी करनी होती है तो उसे लगभग 15 लाख रुपए दहेज देना होता है। यही कारण है कि इस समुदाय के अधिकांश लड़के अविवाहित ही रह जाते हैं।