बेटों के सताए बेबस बाप लड रहे हैं कानूनी जंग, सम्पत्ति वापसी की मांग

विशाल अंग्रीश, चंडीगढ़, (14 जुलाई): चंडीगढ़ में अपने बेटों के सताए बेबस बाप प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। एक दो नहीं ऐसे डेढ़ सौ बाप हैं जिन्हें उनके बेटों ने घर अपने नाम होते ही बेघर कर दिया। वृद्धाश्रम में शरण लिए ये बुजुर्ग अब अपने ही खून के खिलाफ खड़े हैं। कहते हैं कि जो बच्चे आखिरी वक्त में अपने बाप को बेघर कर दें उन्हें पिता की संपत्ति पर हक नहीं है। चंडीगढ़ में ऐसा कानून भी है। 

आखिर क्या करें मांबाप जब औलाद उनका जीना मुहाल कर दे। अपने आखिरी दौर में इनके औलादों ने वो दर्द दिया है कि वो अब किसी की सुनने को तैयार नहीं। अब ये अपने बेटों से हिसाब चाहते हैं। चंडीगढ़ में कोई डेढ़ सौ बुजुर्ग हैं जिन्होंने आवेदन किया है। उन्होंने बेटों को जो संपत्ति सौंपी है वो वापस लौटाई जाए। 

पंजाब के राजपुरा के रहने वाले बख्शीश सिंह के पिता ने सारी संपत्ति अपने पोते यानि बख्शीश सिंह के बेटे के नाम कर दी। बेटा गलत संगत में रहकर नशा करने लगा एक दिन मदहोशी में घर ही में आग लगा दी। बख्शीश सिंह अब वृद्धाश्रम में रहते हैं इन्होंने गुहार लगाई है कि बेटे के नाम संपत्ति उनके नाम की जाए।

ऐसा ही हाल हिमाचल के अनुभव भल्ला का है। बेटे के नाम संपत्ति की थी। लेकिन औलाद ने घर का सामान ही बेचना शुरू कर दिया। सारा पैसा लेकर दिल्ली चला गया। अपने बाप की  जिंदगी भर की कमाई उड़ाने में लगा। अब बाप को वृद्धाश्रम में रहना पड़ रहा है। अनुभव भल्ला कहते हैं कानून तो है लेकिन कोई फायदा नहीं।

चंडीगढ़ के ऐसे बुजुर्गों के लिए एक कानून बना था- मेंटिनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन एक्ट, 2007। इस एक्ट के मुताबिक-

बुजुर्ग मां-बाप की देखभाल की जिम्मेदारी बेटों पर है। अगर वो देखभाल नहीं करते तो एक्ट के मुताबित उन्हें अपने मां-बाप को दस हजार महीने का गुजारा भत्ता देना पड़ सकता है। अगर संपत्ति बेटे के नाम कर दी गई हो तो शिकायत करने पर ये पिता को वापस मिल सकती है। चंडीगढ़ में अपने बेटों से सताए डेढ़ सौ लोगों ने आवेदन दिया है। इस एक्ट के मुताबिक उनकी संपत्ति वापस की जाए।

लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वृद्धाश्रम में ये बुजुर्ग अपनी जिंदगी के आखिर दिन सबसे बुरे हालात में काट रहे हैं।पंजाब के फतेहगढ़ के रहने वाले हरचंद सिंह कहते हैं इस उम्र में भटकना कौन चाहता है। 

चंडीगढ़ का ये वृद्धाश्रम अपने बच्चों के सताए बुजुर्गों का बसेरा है। संपत्ति औलादों के नाम की थी कि बुढ़ापे आसान हो जाएगा। लेकिन अब उन्हें अफसोस है।डेढ़ सौ बुजुर्ग लाइन लगाकर कह रहे हैं कि हमारी संपत्ति बेटों से वापस दिला दो।

साल 2007 में द मेंटिनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन एक्ट लागू हुआ था। तब से साल दर साल शिकायतें बढ़ती ही जा रही है। 2015 में सौ शिकायतें आई थीं। इस बार डेढ़ सौ हैं। बच्चे बाप के कंधों पर पैर रखकर बड़े हो गए हैं।