प्लास्टिक कचरे को रीसाइकल कर करोड़ों कमा रहे ये बाप-बेटे

नई दिल्ली(9 मई): मणिपुर की राजधानी इंफाल में बाप-बेटे की एक जोड़ी आम लोगों के घरों के प्लास्टिक कचरे को रीसाइकल करने का काम कर रही है। इंफाल के रहने वाले सडोक्पम इतोंबी सिंह और सडोक्पम गुनाकांता एक रीसाइकलिंग प्रोग्राम की अगुवाई करके एक कंपनी चला रहे हैं, जो लोगों के घरों से निकलने वाले प्लास्टिक के कचरे को रीसाइकल करती है।कंप्यूटर ऐप्लिकेशंस में ग्रैजुएशन कर चुके इतोंबी का मानना है कि प्लास्टिक हमारे ईको-सिस्टम के लिए खतरा है और प्राकृतिक माहौल को भी बिगाड़ता है, जिससे पौधों, जीव-जंतुओं के साथ-साथ मानव समाज को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए वह अपने पिता के साथ मिलकर मणिपुर को एक सुरक्षित और अच्छे माहौल वाला शहर राज्य बनाना चाहते हैं।इतोंबी ने साल 2007 में एस. जे. प्लास्टिक इंडस्ट्रीज नाम से एक कंपनी शुरू की जो आसपास के इलाके से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को रीसाइकल करने का काम करती है। इससे पहले 90 के दशक में यहां 65 वर्षीय गुनकांता भी इस तरह का छोटा सा काम कर रहे थे। वह पहले प्लास्टिक की बोतलें इकट्ठा करते और उन्हें दिल्ली और गुवाहाटी के प्लास्टिक रीसाइकल प्लांट्स में भेजते थे।साल 2010 में नई मशीनें आने के बाद प्लास्टिक कचरे से पाइप, टब और इसी तरह के कई सारे प्लास्टिक आइटम बनाए जाने लगे। मणिपुर में ही 120 प्रकार के प्लास्टिक की पहचान हुई है। इसमें 30 ऐसे हैं, जिन्हें मणिपुर में ही रीसाइकल किया जाता है और बाकी को गुवाहाटी और दिल्ली भेजा जाता है।गुनाकांता कहते हैं, 'प्लास्टिक को रीसाइकल किया जा सकता है। हमें इस तरह के कचरे को रीसाइकल करने के प्रति सतर्क और जागरूक रहना होगा और हमारे पानी के स्रोतों और अन्य जगहों को प्रदूषित होने से बचाना चाहिए।' वर्तमान में इनकी कंपनी में 35 रेग्युलर स्टाफ और 6 लोग प्रतिदिन मजदरी करने वाले हैं। 1.5 लाख रुपये की लागत से शुरू हुई इस कंपनी का मौजूदा सालाना टर्नओवर 1.2 करोड़ रुपये है।