फास्ट फूड पर सिगरेट जैसी चेतावनी छापने की जरूरत

पल्लवी झा, नई दिल्ली (1 फरवरी): फास्ट फूड पर सिगरेट जैसी चेतावनी छापने की जरूरत पड़ सकती है। ये सवाल इसलिए उठ खड़ा हुआ है, क्योंकि देश के सबसे बड़े अस्पताल के डॉक्टरों ने इस बात को लेकर गंभीर चिंता जताई है कि बच्चों का मोटापा इनके लिए कई गंभीर बिमारियों की वजह बन सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि मोटापे की वजह से बच्चे अपने मां-बाप से पहले मौत के मुंह में जा सकते है।

दुनिया के कई देशों की तरह बच्चों का मोटापा अब हिंदुस्तानी बच्चों के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाय़ा जा सकता है कि डॉक्टर अब इस बात को लेकर संजिदगी से विचार कर रहे हैं कि वजन बढ़ाने वाली खाने पीने की चीजों पर भी सिगरेट के पैकेट की तरह चेतावनी छापी जाए।

अगर डॉक्टरों की चिंता पर कोई एक्शन लिया गया तो फिर चिप्स, कोला और बर्गर जैसे वजन बढ़ाने वाली चीजों पर आपको तस्वीरों के साथ चेतावनी का लेबल दिख सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि जिस तरह सिगरेट के डब्बे पर तस्वीरों के साथ खतरे की चेतावनी छपी होती है, वैसी ही चेतावनी अगर बच्चों में मोटापा बढ़ाने वाली खाने-पीने की चीजों पर छापा जाए तो मासूमों में मोटापे के खतरे से लड़ा जा सकता है।

दरअसल देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स के डॉक्टरों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि हर 4 में से 1 भारतीय बच्चा मोटापे की बीमारी से जूझ रहा है। रिसर्च में ये भी पता चला है कि 11 से 15 साल उम्र के करीब 62 फीसदी बच्चे मोटापा का शिकार हैं। ये मोटापा आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। जिससे बच्चे की उम्र कम हो सकती है।

डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों में मोटापे की बीमारी उनके खाने पीने की आदतों से जुड़ी है। माता-पिता की लापरवाही की वजह से बच्चे अक्सर बाजार में मिलने वाले जंक फूड को खाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। यही वजह है कि अब डॉक्टर फूड पैकेट्स पर मोटापे के खतरे के हिसाब से चेतावनी देने की अपील कर रहे हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि कुछ सावधानी बरतकर मासूमों में मोटापे की बीमारी को दूर रखा जा सकता है। इसके लिए बच्चों को फास्ट फूड से दूर रखें, खाने में फल और सब्ज़ियों पर ज्यादा जोर दें। बच्चों को पौष्टिक नाश्ता देना चाहिए, खाने में ज्यादा घी-तेल का इस्तेमाल ना हो और बच्चों में खेल-कूद को बढ़ावा देना चाहिए।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर उऩकी चेतावनी पर ध्यान ना दिया गया तो ये पहली ऐसी पीढ़ी होगी जो मोटापे से होने वाली बीमारियों की वजह से अपने मां-बाप से पहले मौत के मुंह में जा सकती है।