राजस्थान में 100 में से 62 किसान कर्जदार

नई दिल्ली (5 जून): देश में सूखा, ओले और अंधड़ की मार झेलने वाला किसान बेजार है। उनके घर में न बीज है और न खाद को पैसा। हालात ऐसे हैं कि मजबूरन किसान खेती करने को खाद, बीज सहित अन्य कृषि उपकरण के लिए बैंक से कर्जा ले रहे हैं और कर्जे में डूबे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं।

नेशनल सैम्पल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राजस्थान में 100 में से 62 किसान कर्जदार हैं। वहीं देश के कर्जदार किसानों में राज्य का छठा नंबर है। एनएसएसओ ने जनवरी 2013 से दिसम्बर 2013 में देशभर के किसानों की आय, व्यय, उत्पादन, परसम्पतियों और ऋण को लेकर सर्वे किया था। इसमें राजस्थान के 214 गांव और 3309 कृषक परिवार को शामिल किया।

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 61.8' किसान किसी न किसी के कर्जदार हैं। एक किसान पर औसत कर्ज 40055 रु. है। रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 52 प्रतिशत किसान कर्जदार है, जबकि 2003 में सिर्फ  48.6 प्रतिशत किसान थे। किसान परिवारों की औसत मासिक आय 6426 रु. और व्यय 6223 रु. है। करीब 203 रु. की बचत में कैसे किसान अपने सपने पूरे करे।

कर्ज माफी की खुली पोल 2008 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने कर्ज माफी योजना चलाई थी। सरकार ने किसानों के करीब 52000 करोड़ रु. के कर्जे को माफ करने का दावा किया था। दावा था कि इससे कर्ज में डूबे किसानों की संख्या में कमी आएगी। वे खुशहाल होंगे। एनएसएसओ रिपोर्ट के आंकड़ों ने उक्त योजना की पोल खोल दी। आंकड़े गवाह हैं कि देश में कर्ज के बोझ से दबे किसानों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती रही है।