एक साल में 42 फीसदी बढ़े किसानों की आत्महत्या के मामले

नई दिल्ली(6 जनवरी): पांच साल में किसानों की आय दोगुनी करने के दावों के बीच किसानों की बदहाली की एक बेहद दुखद तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने खुलासा किया है कि वर्ष 2015 में कुल 8007 किसानों ने आत्महत्या की, जो वर्ष 2014 में आत्महत्या करने वाले 5650 किसानों की संख्या की तुलना में 42 फीसदी अधिक है।

- हालांकि, इस दौरान कृषि श्रमिकों की आत्महत्या की दर में 31 फीसदी से अधिक की कमी भी दर्ज की गई।

- वर्ष 2014 में जहां 6710 कृषि श्रमिकों ने आत्महत्या की थी, वहीं वर्ष 2015 में 4595 कृषि श्रमिकों ने जीवन त्याग दिया।

-'एक्सिडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड इन इंडिया 2015Ó की रिपोर्ट के अनुसार किसानों की 87 फीसदी आत्महत्या महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र और तमिलनाडु में हुई हैं।

- मध्यप्रदेश में वर्ष 2015 में 1290 किसानों ने आत्महत्या की। यानी औसतन रोजाना तीन से अधिक । इसी तरह छत्तीसगढ़ में 954 किसानों ने एक साल में जान दीए यानी रोजाना दो से अधिक।