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'अयोध्या' फैसले के लिए याद किये जायेंगे जस्टिस गोगोई, लो प्रोफ़ाइल रहा विदाई समारोह

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के द्वारा जजों के रिटायर होने पर दिया जाने वाला परंपरागत विदाई समारोह बहुत लो प्रोफ़ाइल रहा। टेंट कनात तो लगा था, रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था भी थी लेकिन रिटायर हो रहे मुख्यन्यायाधीश के लिए कोई स्टेज नहीं और न ही कोई डायस था।

प्रभाकर मिश्रा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (15 नवंबर): मुख्यन्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई का आज शुक्रवार को आखरी 'वर्किंग डे' था। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के द्वारा जजों के रिटायर होने पर दिया जाने वाला परंपरागत विदाई समारोह बहुत लो प्रोफ़ाइल रहा। टेंट कनात तो लगा था, रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था भी थी लेकिन रिटायर हो रहे मुख्यन्यायाधीश के लिए कोई स्टेज नहीं और न ही कोई डायस था। परंपरा के मुताबिक, रिटायर होने वाले जज के आखरी कार्य दिवस पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन विदाई समारोह का आयोजन करता है। इस समारोह में रिटायर हो रहे जज के बारे में अच्छी अच्छी बातें कही जाती हैं। उनके लीगल प्रोफेशन, उनके द्वारा ढ़िये गए महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में बात की जाती है। खुद रिटायर हो रहे जज भी अपनी बात कहते हैं। लेकिन आज ऐसा कुछ नहीं हुआ। कोई विदाई भाषण नहीं। क्योंकि जस्टिस रंजन गोगोई ही ऐसा चाहते थे। अपनी विदाई समारोह में खुद जस्टिस गोगोई ने भी कुछ नहीं बोला। उनके तरफ से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के नाम बस एक संदेश पढ़ दिया गया। जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर, रविवार को रिटायर हो रहे हैं। 18 नवंबर जस्टिस को एसए बोबडे मुख्यन्यायाधीश का पदभार संभालेंगे।

अपने कार्यकाल के आखरी दिन परंपरा के मुताबिक मुख्यन्यायाधीश गोगोई अपने उत्तराधिकारी जस्टिस बोबड़े के साथ कोर्ट रूम में बैठे थे। जस्टिस गोगोई आज केवल तीन मिनट के लिए कोर्ट में बैठे थे और इस दौरान उनके सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध सभी दस मामलों में संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी किया। 17 नवंबर को चीफ जस्टिस के कार्यकाल का अंतिम दिन है, लेकिन वीकेंड है।

जस्टिस गोगोई अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण फैसले के लिए जाने जाएंगे। देश के सबसे पुराने और संवेदनशील अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसले के लिए जस्टिस रंजन गोगोई को सबसे ज्यादा याद किया जाएगा। इसके अलावा जस्टिस गोगोई को मुख्यन्यायाधीश का कार्यालय सूचना के तहत आने के फैसले के लिए भी याद किया जाएगा। जस्टिस गोगोई ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों अयोध्या के आलावा, कर्नाटक के विधायकों का मामला, सबरीमला केस, राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना के मामले में फैसला सुनाया। 

रंजन गोगोई के कार्यकाल की एक खास बात यह रही कि वो पदभार करते वक्त और अब सेवानिवृत्त होते वक्त भी वो राजघाट गये। उन्होंने राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पचक्र अर्पित किया।

जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने कार्यकाल के आखरी दिन कोर्ट की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को भेजी चिट्ठी में मीडिया की सराहना की। जस्टिस गोगोई ने चिट्ठी में लिखा था कि कठिन मौकों पर भी ज़्यादातर मीडिया ने परिपक्वता दिखाई। झूठी जानकारी नहीं फैलने दी। सच्चाई के रखवाले, लोकतंत्र के प्रहरी की भूमिका निभाई।

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