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अर्थव्यवस्था की सुस्ती ने बढ़ाया कंपनियों के सीनियर अधिकारियों में मानसिक तनाव

आर्थिक मंदी, काम का प्रेशर, नौकरी जाने के डर के बीच कंपनियों की कमान संभाल रहे सीनियर मैनेजरों का मानसिक तनाव बढ़ रहा है। एक अध्यन के मुताबिक जिस तरह से पूरे विश्व में आर्थिक मंदी

पल्लवी झा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(18 सितंबर): आर्थिक मंदी, काम का प्रेशर, नौकरी जाने के डर के बीच कंपनियों की कमान संभाल रहे सीनियर मैनेजरों का मानसिक तनाव बढ़ रहा है। एक अध्यन के मुताबिक जिस तरह से पूरे विश्व में आर्थिक मंदी की शुरुआत हुई है उससे डिप्रेशन यानी तनाव के मरीजों की संख्या पिछले छह महीने में ज़्यादा बढ़ गई है। कॉस्मोज इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ ऐंड बिहेवियरल साइंस (CIMBS) के अध्ययन के मुताबिक, सीनियर प्रफेशनल्स के मानसिक स्वास्थ्य पर असर तीन गुना तक बढ़ा है।

2019 में स्ट्रेस की शिकायत करने वाले कर्मचारियों की संख्या पर ग़ौर करें है तो पिछले साल से दोगुनी बढ़कर 16 पर्सेंट पहुंच गई है।वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां बढ़ गई हैं। 5.6 करोड़ लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। 3.8 करोड़ को चिंता संबंधित परेशानियां हैं। काउंसलर और मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बताया कि ज्यादातर कॉल ऐसे सेक्टरों से आ रही हैं, जिन पर आर्थिक सुस्ती का अधिक असर पड़ा है। 

इनमें ऑटोमोबाइल, टेलिकॉम, रियल एस्टेट और फाइनैंशल सर्विसेज शामिल हैं। इसके अलावा इन सेक्टरों में काम करने वाले लोगों की पत्नियां भी डिप्रेशन का शिकार हो रही है। मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले आर्थिक ढोलाकिया पिछले एक साल से तनाव में है। लेकिन इस बात इनको इल्म ही नही था। पर जीवन में उथल पुथल इतना होने लगा की फिर इनको समझ आया की कुछ जीवन में गड़बड़ है। और तब पता लगा कि डिप्रेशन ने उनको जकड़ लिया जिसकी वजह ऑफिस का अनचाहा प्रेशर था। 

वहीं इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने बताया कि रेगुलेटर्स और अन्य सरकारी एजेंसियों के नियम कड़े करने से भी मुश्किलें बढ़ी हैं। जो कंपनियां सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं, उनके लिए माहौल और खराब हो गया है।। बिजनस में अगर किसी की परफॉर्मेंस खराब होने से नुकसान होता है, तो सीनियर लीडर के लिए तनाव बढ़ जाता है। ऐसे में हम अक्सर खुद तनाव पाल लेते हैं। अगर बोर्ड ने बहुत मुश्किल टार्गेट सेट कर दिया, तो उससे भी तनाव कई गुना बढ़ जाता है।' बहरहाल इन तमाम चीज़ों के बीच जानकार यही कहते हैं कि ऐसी परेशानी का इलाज एक दम से संभव नहीं है। 

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