सरकार के दावे को झटका, कहां गए नकली नोट ?



नई दिल्ली (21 जनवरी): 8 नवंबर को पीएम मोदी ने 500 और 1000 के पुराने नोटों पर पाबंदी का ऐलान किया था। इस नोटबंदी को लेकर सरकार और अन्य एजेंसियों का दावा था कि इससे जहां भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम लगेगा, वहीं सिस्टम में चल रहे नकली नोट पर काबू पाया जा सकेगा और इससे नकली नोटों के सौदागर और आतंकियों पर लगाम लग सकेगा।


लेकिन अब खुद वित्त मंत्रालय ने माना है कि 8 नवंबर से 30 दिसंबर के दौरान नकली नोटों की रिकवरी नहीं हो सकी। पुराने नोट जमा कराने के लिए दिए गए 50 दिनों के वक्त के दौरान नकली नोटों की रिकवरी का एक भी मामला सामने नहीं आया।


इतना ही नहीं, सरकार का एक और दावा था कि नोटबंदी से नकली नोटों के कारोबार से आतंकियों और स्मगलर्स के कारोबार को भी बड़ा झटका लगेगा। लेकिन किसी आतंकी-स्मगलर्स के समूह के पास से नोटों की जब्ती की कोई जानकारी सरकार के पास नहीं है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सरकार दोनों ही ने इस बात का दावा किया था नोटबंदी से आतंक की फंडिंग में इस्तेमाल हो रहे नकली नोटों की रिकवरी हो सकेगी। 


हालांकि वित्त मंत्रालय का कहना है कि नोटबंदी से प्रत्यक्ष कर के नेट कलेक्शन में 12.01 फीसदी की, इनकम टैक्स कलेक्शन्स में 24.6 फीसदी की और अडवांस कलेक्शन में 14.4 फीसदी की वृद्धि देखी गई। वृद्धि के ये आंकड़े पिछले साल के मुकाबले हैं। नोटबंदी पर सवालों के जवाब देते हुए वित्त मंत्रालय ने पब्लिक अकाउंट्स कमिटी यानी PAC को बताया कि कॉर्पोरेट इनकम टैक्स 10.6 फीसदी और पर्सनल इनकम टैक्स 38.2 फीसदी की दर से बढ़ रहा है।