30 साल की उम्र में पहनी नीली जर्सी, इस जगह से खेलने वाला तीसरा क्रिकेटर

नई दिल्ली(15 जून): जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में टीम इंडिया ने अंतिम ग्यारह में एक बदलाव किया है। टीम में ओपनर बल्लेबाज करुण नायर की जगह फैज फजल को मौका दिया गया है। विदर्भ के इस 30 वर्षीय क्रिकेटर को नीली जर्सी पहनने का मौका मिल ही गया। कप्तान धोनी ने उन्हें कैप पहनाया।

फैज फजल विदर्भ की तरफ से भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले विदर्भ की तरफ से भारतीय टीम के लिए प्रशांत वैद्य और उमेश यादव भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 

फैज फजल ने भारतीय टीम में शामिल किए जाने पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि ये उनके लिए कभी नहीं भूलने वाला पल है साथ ही उनके लिए गर्व की बात है। फैज ने बताया कि वर्ष 2004 में वो भारतीय अंडर 19 टीम में शामिल नहीं हो पाए थे और उनकी जगह शिखर धवन को मौका मिला था। इसके बाद घरेलू मैचों में लगभग 10 वर्षों तक मेहनत करने के बाद उन्हें टीम में शामिल होने का मौका मिला। जब उन्हें भारतीय टीम में शामिल किया गया उस वक्त वो इंग्लैंड में लीग क्रिकेट खेल रहे थे।

2003 में विदर्भ के लिए रणजी ट्रॉफी में अपना प्रथम श्रेणी डेब्यू करने वाले फजल के नाम 79 प्रथम श्रेणी मैचों में 40.15 की औसत से 5341 रन दर्ज हैं, जिनमें 11 सेंचुरी और 27 हाफ सेंचुरी शामिल हैं। वह आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से भी खेल चुके हैं। उन्होंने 2010 और 2011 में राजस्थान के लिए आईपीएल खेला, उनके नाम 12 आईपीएल मैचों में 183 रन दर्ज हैं और उनका उच्चतम स्कोर 45 रन रहा है। हालांकि इस वर्ष फरवरी में हुई आईपीएल नीलामी में 10 लाख की बेस प्राइज वाले फजल को कोई खरीददार नहीं मिला था। इसके बाद ही वह इंग्लैंड के डरहम में नॉर्थ ईस्ट लीग के प्रीमियर डिविजन में हेटेन लायंस क्रिकेट क्लब की तरफ से खेलने चले गए। फजल का जब जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम में चयन हुआ तो वह इंग्लैंड में थे।

भले ही फजल विदर्भ के लिए एक दशक से भी ज्यादा लंबे समय से शानदार प्रदर्शन करते आए हैं और उनके नाम 79 प्रथम श्रेणी मैचों में 5000 से ज्यादा रन दर्ज हैं। लेकिन रणजी के 2015-16 सत्र में उन्होंने 15 पारियों में 39.93 की औसत से 559 रन ही बनाए हैं। इस साल जनवरी में उन्होंने देवधर ट्रॉफी के फाइनल में इंडिया-ए के सेंचुरी जड़ी और उसे चैंपियन बनाया फिर मार्च में खेले गए ईरानी कप के फाइनल में रणजी चैंपियन मुंबई के खिलाफ भी दूसरी पारी में सेंचुरी लगाते हुए इंडिया-ए की जीत में अहम भूमिका निभाई।

ईरानी कप और देवधर ट्रॉफी के इन जोरदार प्रदर्शनों ने ही चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। इन प्रदर्शनों ने वह काम कर दिया जो फजल की एक दशक की बैटिंग भी नहीं कर पाई।