किसानों की कर्जमाफी से सरकार की टूटेगी कमर

विनोद जगदाले, मुंबई (3 जून): महाराष्ट्र के किसानों ने अपनी हड़ताल पीछे ले ली है। 31 अक्टूबर तक सरकार छोटे किसानों को राहत देगी, मतलब छोटे किसानों का कर्ज सरकार को माफ करना है, लेकिन पहले से कर्ज के तले दबे फडणवीस सरकार अगर किसानों का कर्ज माफ करती है तो यह सरकार आर्थिक इमरजेंसी में फंस जाएगी।

महाराष्ट्र में बिगड़ रहे कानून व्यवस्था के हालात को देखते हुए सूबे के मुखिया देवेंद्र फडणवीस भले ही छोटे किसानों के कर्ज माफी की मांग को कबूला हो, लेकिन महाराष्ट्र सरकार की माली हालत काफी खराब है। इसलिए महाराष्ट्र में किसानों की कर्ज माफी के लिए फडणवीस को दिल्ली के सामने झोली फैलानी होगी। कर्ज माफी की आस लगाए ज़्यादातर किसानों ने कर्ज की वापसी लगभग बंद कर दी है। कर्ज में डूबे महाराष्ट्र के किसानों का कर्ज अगर सरकार माफ करती है तो सरकार पर 50 से 60 हज़ार करोड रुपयो का बोझ बढ़ जाएगा।

- महाराष्ट्र में किसानों की संख्या 1 करोड़ 34 लाख

- जिनमें 31 लाख 57 हज़ार ऐसे किसान है, जिन्होंने अपना पिछला कर्ज नहीं वापस किया।

- पिछले साल फसल के लिए 51 हज़ार करोड़ रुपये के कर्ज किसानों को बांटे गए। इसमें से अबतक सिर्फ 25 से 30 फीसदी कर्ज चुकाए गए।

31 लाख 57 हज़ार किसानों में से अधिकतर किसानों के कर्ज 2012-2013 के है। इसलिए इन्हें नए सिरे से कर्ज नहीं मिल सकता। 2015 में महाराष्ट्र में अकाल था, इसलिए राज्य सरकार ने किसानों कब पिछले कर्ज का पुर्न: गठन कर तीन से 5 साल के ईएमआई किसानों को बनाकर दिए, फिर भी किसानों ने कर्ज नहीं चुकाया। अब सरकार ने फिर से पिछले कर्ज का पुर्न: गठन करने के लिए आरबीआई और नाबार्ड से संपर्क किया, लेकिन सरकार की इस मांग को नकार दिया गया। 

अगर महाराष्ट्र सरकार पिछले बार के कर्ज ना चुका सके 31 लाख किसानों की कर्ज माफी करती है तो यह आंकड़ा 30 हज़ार करोड़ तक जा सकता है और पुराना कर्ज नहीं चुकाने से अबकी बुआई के लिए किसान कर्ज लेने के लिए पात्र (एलिजेबल) नहीं हो सकता। ऐसे में सरकार के सामने 2 विकल्प बचते है एक तो सरकारी खजाने से किसानों का पहले का कर्ज माफ किया जाए या फिर सरकारी खजाने से किसानों को नए कर्ज दिए जाए।