महाराष्ट्र सरकार के सर्कुलर पर उठा विवाद

विनोद जगदाले, मुंबई (25 जनवरी): हिंदू धर्म को आधार बनाकर अपनी सियासत शुरू करने वाली बीजेपी पर अब इस धर्म को आधार बनाकर एक के बाद एक हमले किया जा रहे हैं। इसकी वजह बना हैं वो विवादीत सर्कुलर जिसमें सरकारी दफ्तरों, सरकारी शिक्षा संस्थानों में किसी भी धार्मिक प्रतिकों, पुजा-पाठ और प्राथर्ना करने पर पाबंदी लगा दी गई है।

शिवसेना सहित तमाम विपक्षी दल इस सर्कुलर को पीछे लेने की मांग पर अड़ गए हैं। वहीं हिंदू संगठनों ने भी सरकार के खिलाफ झंडा बुलंद कर दिया है।

महाराष्ट्र सरकार का फरमान...

- सरकारी संस्थानों, कार्यालयों में प्रार्थना करने पर पाबंदी

- किसी भी धर्म के प्रतिकों और मुर्तीयां ना लगाने के आदेश

- भगवान और धार्मिक गुरुओं की तस्वीरों को हटाओं

महाराष्ट्र सरकार के ग्राम विकास विभाग द्वारा जारी किए गए इस सर्कुलर पर सियासी बवाल खड़ा हो गया है। भारतीय संविधान की दुहाई देते हुए राज्य के सभी सरकारी दफ्तर, स्कुल और कॉलेज में जो भी धार्मिक प्रतिक हैं उन सभी को हटाने के आदेश दिए है।

इस सर्कुलर के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की सत्ता में सहयोगी शिवसेना ही विरोध में उतर आई है। शिवसेना ने आरोप लगाया हैं कि बीजेपी ने इस सर्कुलर से हिंदू धर्म की आस्था को ठेस पहुंचाया है। वहीं कांग्रेस-एनसीपी ने भी इस सर्कुलर का कड़ा विरोध किया है।

दरअसल, महाराष्ट्र के कई सरकारी दफ्तरों, स्कुलों और कॉलेजों में भगवान की तस्वीरें रखना बहुत आम है। कई सरकारी दफ्तरों में तो बाकायदा सुबह शाम पुजा पाठ भी होता है। अब कई हिंदू संगठनों ने भी इस सर्कुलर के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया है। इस सर्कुलर पर हुए विवाद से फडणवीस सरकार बैकफुट पर आ गई है। बीजेपी का कहना है कि नियम के मुताबिक ही यह सर्कुलर जारी किया गया है।

चूंकि ये मामला आस्था से जुडा हुआ है इसिलिए चुनावी माहौल में सभी राजनितीक दल इस मुद्दे को भुनाने में लग गए है। विवाद के बाद यह सर्कुलर पीछे लिया जाएगा या नहीं इस बारे में तो फिलहाल कहना मुश्किल हैं, लेकिन आस्था से जुडे़ इस मुद्दे पर बीजेपी को नुकसान जरूर उठाना पड़ सकता है।