फेसबुक के Ex मैनेजर ने ज़ुकरबर्ग के बारे में किया ये बडा़ खुलासा

नई दिल्ली (1 जुलाई): फेसबुक से निकाले गए एडवरटाइजिंग मैनेजर ने कंपनी के वर्क कल्चर से जुड़े खुलासे किए हैं। इसका नाम एनटोनियो ग्रेशिया मार्टिनेज है। मार्टिनेज ने फेसबुक और मार्क जुकरबर्ग पर एक किताब लिखी है। इसी किताब में एनटोनियो ग्रेशिया मार्टिनेज ने खुलासा किया है कि फेसबुक में स्टाफ से 20 घंटे तक काम करवाया जाता और लड़कियों के लिए ड्रेस कोड है, ताकि बाकी इम्प्लॉइज का ध्यान काम से न भटके। कंपनी से निकाले गए एडवरटाइजिंग मैनेजर ने अपनी किताब में लिखा है कि   फेसबुक में नौकरी करना नॉर्थ कोरिया में काम करने जैसा है।  

उन्होंने लिखा है कि फेसबुक में कई तरह की पाबंदियां हैं, जिससे तानाशाही का अहसास होता है। जब कोई नया एंप्लाई कंपनी ज्वाइन करता है तो उसे फेसवर्सरी कहा जाता है। उसके लिए वैसा ही सेलिब्रेशन किया जाता है, जैसे क्रिसमस का। दूसरी तरफ, जब कोई कंपनी छोड़ता तो उसे 'डेथ' कहा जाता है। उसका आईडी कार्ड तहस-नहस कर फोटो अपलोड कर दिया जाता है। फेसबुक में इम्प्लॉइज पर नजर रखने के लिए केजीबी की खुफिया एजेंसी के तौर-तरीकों जैसी इंटरनल पुलिस है। इसे 'द सेक' कहते हैं।

फेसबुक की चीफ ओपरेटिंग ऑफिसर शेरिल सेंडबर्ग ने एक बार प्रेजेंटेशन के दौरान यूजर्स की जगह बिल्लियों की फोटोज यूज की थीं। जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों किया, तो प्रोडक्ट मैनेजर डेन रूबेस्टिन ने गाली देना शुरु कर दिया।  मार्टिनेज ने लिखा है, जुकरबर्ग को चीजें सीक्रेट रखना बहुत पसंद है। एक एंप्लाई ने जब नए लॉन्च होने वाले प्रोडक्ट की जानकारी लीक कर दी तो जुगरबर्ग ने उससे जुड़े हर वर्कर को गंदी लैंग्वेज में मेल किया।  जुकरबर्ग ने स्टाफ से उनके नए ऑफिस को पेंट करने के लिए कहा था। दो दिन बाद जब उन्होंने ऑफिस देखा तो भड़क गए, क्योंकि वहां ड्रॉइंग्स लगा दी गई थीं।

उन्होंने सारे वर्कर्स को गंदी लैंग्वेज में मेल लिखकर डांटा था। जब भी टारगेटेड एडवरटाइजिंग पर मीटिंग होती, तो जुकरबर्ग टेक्निकल डिटेल्स देखते ही नहीं हैं, क्योंकि उनमें पेशेंस नहीं हैं। जुकरबर्ग ने कई ऐसे डिसीजन लिए हैं, जिनसे कई लोगों पर असर पड़ा। जुकरबर्ग का ऑफिस पूरी तरह ग्लास से बना है, इसलिए इसे 'द एक्वेरियम' कहा जाता है। सीओओ सेंडबर्ग केवल अच्छी खबर ही सुनना चाहती हैं, इसलिए उनके कॉन्फ्रेंस रूम को 'ओनली गुड न्यूज' कहा जाता है।