JNU के रीसर्चर्स पर लगा 'फर्जी' शोधपत्र प्रकाशित कराने का आरोप

नई दिल्ली (7 जनवरी): प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के शोधकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगा है। क्रॉप प्रोटेक्शन इंडस्ट्री बॉडी, क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीसीएफआई) और फार्म लीडर्स ने गुरुवार को आरोप लगाया, कि भारतीय सब्जियों में पेस्टीसाइड के इस्तेमाल से होने वाले संदूषण पर शोध करने वाले जेएनयू शोधकर्ताओं ने विदेशी जरनल्स में फर्जी शोधपत्र प्रकाशित कराए। जिसके खिलाफ इन संस्थाओं ने फर्जीवाड़े में शामिल वैज्ञानिकों और यूनिवर्सिटी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीएफआई ने बताया कि पेस्टीसाइड अवशेष पर 2014 में अमेरिका और यूरोप में जेएनयू की तरफ से ये स्टडीस प्रकाशित करवाई गईं। इनमें दावा किया गया कि सब्जियों के 52 सैंपल्स में 20 विभिन्न प्रतिबंधित पेस्टीसाइड्स का इस्तेमाल किया गया। ये सैंपल्स दिल्ली/एनसीआर से इकट्ठे किए गए थे। सीसीएफआई ने एक बयान में बताया, ''पेस्टीसाइड्स अवशेष पर फर्जी रिपोर्ट्स अमेरिका और यूरोप में जेएनयू रीसर्चर्स की तरफ से प्रकाशित की गईं। जिनमें कहा गया था कि 20 विभिन्न प्रतिबंधित पेस्टीसाइड्स के इस्तेमाल से भारतीय सब्जियों में 100 फीसदी संदूषण हुआ है।''

सीसीएफआई अधिकारी ने कहा, ''शोधकर्ताओं के साथ जेएनयू पर भी कार्रवाई करने की मांग की गई है। जेएनयू शोधकर्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए क्योंकि इन रिपोर्ट्स ने भारतीय कृषि की छवि खराब की है।''

जब जेएनयू के वरिष्ठ अधिकारी से इस संबंध में संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया, ''शोधपत्र हमारे साथी की तरफ से एक अंतर्राष्ट्रीय जरनल में प्रकाशित किया गया था। यूनिवर्सिटी सीधे तौर पर इस आरोप में शामिल नहीं हो जाती, क्योंकि फैकल्टी स्वतंत्र रूप से रीसर्च कर इसे प्रकाशित करा सकते हैं। प्रशासन रीसर्च एक्टिविटीस में हस्तक्षेप नहीं करता। अगर कुछ होता है जैसे प्लैजिरिज्म़, जो हमारे नोटिस में लाया जाता है, तो हम कार्रवाई करते हैं।''

आईसीएआर ने जेएनयू को तीन चिट्ठियां लिखी हैं, जिनमें रॉ डेटा की मांग की है। सीसीएफआई ने आरोप लगाया है कि ''केंद्रीय यूनिवर्सिटी रीसर्च मिसकंडक्ट कर रही है। जेएनयू आरटीआई कानून के तहत कोई भी लैबोरेट्री डेटा प्रस्तूत नहीं कर सका है। इसके अलावा लैबोरेट्री एनालिसिस की असल तारीख और कैमिस्ट्स के नाम अभी तक गोपनीय और अज्ञात हैं।''