चीन, पाकिस्तान सीमा पर भारतीय रेलवे और सेना बना रही है ये बड़ा प्लान

नई दिल्ली ( 12 मार्च ): सेना के आधारभूत ढांचे की जरूरतों को पूरा करने को रेलवे को सर्वोच्च वरीयता देने को कहा गया है। चीन के साथ पूर्वी सीमा और पाकिस्तान के साथ सटी देश की पश्चिमी सीमा पर भारत अपना रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि सेना के सर्वोच्च अफसरों ने रणनीतिक जरूरतों के बारे में रेलवे को बता दिया है और रेलवे ने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया है। चीन के मद्देनजर सेना के लिए यह सुविधाएं अरुणाचल प्रदेश के भालुकपुंग, असम के सिलापाथर व माकुम और नगालैंड के मोकोकचुंग और दीमापुर में स्थापित की जाएंगी। रेलवे ने अपने अफसरों को भी पूर्वोत्तर और पाकिस्तान से लगी भारतीय सीमा के विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर भेज दिया है, ताकि वह पता कर सकें कि सेना की आधारभूत ढांचे को लेकर क्या खास जरूरतें हैं। पाकिस्तान के साथ लगती सीमा के पास टैंकों के तेज मूवमेंट के लिए भी इसी तरह के रैम्प बनाए जाएंगे। 

सूत्रों ने बताया कि मिलिट्री स्पेशल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए ट्रायल भी किए जा रहे हैं। ये ट्रेनें अभी केवल 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती हैं। इसका कारण इन ट्रेनों पर भारी वजन और अलग-अलग आकार वाले साजोसामान का लदा होना होता है। बॉर्डर के करीब रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने का मकसद सेना और उपकरणों के जल्द मूवमेंट के साथ ही बड़े खतरे की स्थिति में सेना को एक सेक्टर से दूसरे में शिफ्ट करना भी है। 

सेना का अधिकतर ट्रांसपॉर्टेशन रेल के जरिए होता है, क्योंकि सैनिकों और उपकरणों को हवाई जहाज के जरिए ले जाने की क्षमता कम है। सेना प्रत्येक वर्ष ट्रांसपॉर्टेशन के लिए 750-800 मिलिट्री स्पेशल ट्रेनों का इस्तेमाल करती है। सूत्रों ने बताया कि स्पेशल ट्रेनों और अन्य सर्विसेज के इस्तेमाल के लिए रेलवे को सेना से सालाना 2,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलता है। बहुत स्थानों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होने और सेना का बजट कम होने की स्थिति में रेलवे अपने बजट का भी इस्तेमाल करती है। 

सेना के पास 5,000 रेलवे वैगन भी हैं। इन वैगन की ट्रैकिंग के लिए रेलवे ने एक कंप्यूटराइज्ड सिस्टम बनाया है। चीन की सीमा के नजदीक सड़कों, अंडरग्राउंड टनल और पुल बनाने पर भी फोकस किया जा रहा है। इससे वास्तवित नियंत्रण रेखा (एलएसी) के लिए कनेक्टिविटी बढ़ सकेगी। चीन के साथ डोकलाम विवाद के मद्देनजर एलएसी के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाना महत्वपूर्ण है।