भयंकर कंगाली के कगार पर पाकिस्तान, चीन से मांगा कर्ज

नई दिल्ली ( 28 मई ): पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कंगाली दुनियाभर में सभी को पता है। ऐसे में देश को भयंकर कंगाली से निकालने के लिए इस्लामाबाद ने एक बार फिर अपने दोस्त चीन की तरफ रुख किया है। पाकिस्तानी सरकार के सूत्रों के मुताबिक इस्लामाबाद ने चीन से 1-2 अरब डॉलर यानी करीब 68-135 अरब रुपयों के बीच ताजा कर्ज मांगा है।पाक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन और उसके सरकारी बैंकों द्वारा पाकिस्तान को दिया गया कर्ज इस साल जून तक 5 अरब डॉलर तक पहुंचने वाला है। दरअसल, चीन से इतने बड़े स्तर पर कर्ज मांगने के पीछे एक महत्वपूर्ण वजह अमेरिका की ओर से पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद का रुकना भी है।चीन से कर्ज लेकर पाकिस्तान अपनी तेजी से कम हो रहे विदेश मुद्रा भंडार को बचाने की कोशिश करेगा। बीते साल मई में पाकिस्तान के पास 16.4 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा भंडार था जो बीते हफ्ते कम होकर 10.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। बता दें कि यह लोन ऐसे समय में मांगा गया है जब इसी साल अप्रैल में चीन के कमर्शल बैंकों ने पाकिस्तान सरकार को 1 अरब डॉलर का कर्ज दिया था।विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट और पाकिस्तान के चालू खाता घाटे के लगातार बढ़ने की वजह से कई फाइनैंशल ऐनालिस्ट्स का मानना है कि जुलाई में होने वाले आम चुनाव के बाद पाकिस्तान को साल 2013 के बाद अब अपने दूसरे बेलआउट पैकेज के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। IMF ने पिछली बार पाकिस्तान को 6.7 अरब डॉलर की सहायता दी थी।पाकिस्तान एक बार फिर साल 2013 जैसे आर्थिक संकट की स्थिति में पहुंच गया है। देश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इस महीने पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर को अगले साल के लिए घटाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है। जो कि सरकार के 6.2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी कम है।इस साल मार्च तक पाकिस्तान ने उससे पहले के 6 महीनो में चीन से 1.2 अरब डॉलर का लोन लिया था। इसी समयावधि के दौरान पाकिस्तानी सरकार ने चीन से 1.7 अरब डॉलर का कमर्शल लोन भी लिया, जो अधिकांश चीनी बैंकों की तरफ से दिए गए। अप्रैल माह में पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने एक बार फिर चीन के कमर्शल बैंकों से 1 अरब डॉलर का कर्ज लिया।