दलितों-अल्पसंख्यकों पर बढ़ रहे हमले लोकतंत्र के लिए खतरा: पूर्व PM मनमोहन सिंह

नई दिल्ली (12 अप्रैल): पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कहा कि देश में अल्पसंख्यकों एवं दलितों के उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन पर लगाम नहीं लगाई गई तो लोकतंत्र को नुकसान हो सकता है। उन्होंने ‘विभाजनकारी नीतियों एवं राजनीति’ को खारिज करने का आह्वान भी किया।

पंजाब यूनिवर्सिटी में पहले एस बी रांगनेकर स्मृति व्याख्यान में सिंह ने यह भी कहा कि राजनीतिक संवाद में खतरनाक और झूठ का एक मिश्रण उभर रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक खतरा हो सकता है। गौरतलब है कि मनमोहन सिंह पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हैं।

मनमोहन सिंह ने लोगों को बांटने की कथित कोशिशों पर भी चिंता जताई। सिंह ने कहा, मुझे इस गहरी चिंता पर ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं है कि भारतीय लोगों को धर्म एवं जाति, भाषा एवं संस्कृति के आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है। अल्पसंख्यकों एवं दलितों के खिलाफ उत्पीड़न बढ़ रहा है। यदि इस पर लगाम नहीं लगाई गई तो ये प्रवृतियां हमारे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं। एक जनसमूह के तौर पर हमें विभाजनकारी नीतियों एवं राजनीति को मजबूती से खारिज करना चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि किसी देश की आजादी का मतलब सिर्फ वहां की सरकार की आजादी नहीं है। उन्होंने कहा, यह लोगों की आजादी है जो बदले में सिर्फ इसके विशेषाधिकार प्राप्त एवं ताकतवर लोगों की आजादी नहीं है, बल्कि हर भारतीय की आजादी है। उन्होंने कहा, आजादी का मतलब है सवाल करने की आजादी, नजरिया पेश करने की आजादी, चाहे यह किसी अन्य के लिए कितना ही कष्टप्रद क्यों न हो। आजादी की एकमात्र असहजता दूसरों की आजादी होनी चाहिए। दूसरे शब्दों में, किसी व्यक्ति या समूह की आजादी का इस्तेमाल दूसरे लोगों या समूहों की आजादी में बाधा डालने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. 

मनमोहन ने कहा कि आजादी के विचार के लिए ठोस प्रतिबद्धता के बगैर लोकतंत्र जीवित नहीं रहेगा। भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि भारत की आजादी एवं स्वतंत्रता बरकरार रखने की प्रतिबद्धता पर फिर से जोर देने की जरूरत है।