नेपालियों के प्रति जिम्मेदरी नहीं छोड़ी- पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र

नई दिल्ली (11जनवरी): नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र शाह ने कहा है कि उन्होंने सिर्फ राजमहल का त्याग किया है, नेापली नागरिकों के प्रति अपने दायित्वों को नहीं छोड़ा है। 'काठमाण्डू पोस्ट डॉट ई कांतिपुर डॉट कॉम' ने पूर्व नरेश के एक प्रेस नोट के हवाले से लिखा है कि पृथ्वी जयंती के अवसर पर लिखे गये प्रेसनोट में पूर्व नरेश कहा है कि जनता और राष्ट्रहित में उन्होंने सत्ता का त्याग किया है। लेकिन लोगों को याद रखना चाहिए कि मैंने अपना घर और राष्ट्र के साथ नेपालियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी अब भी अपने पास ऱखी है।

उन्होंने कहा कि आज नेपाली दो जून की रोटी को भी मोहताज हो गये हैं। यह एक गंभीर प्रश्न है। नेपाल के लोग चाहते हैं कि जो भी विवाद उनके जीवन-यापन पर भारी पड़ रहे हैं उनका तुरंत हल होना चाहिए। यह भी विचारणीय प्रश्न है कि लोग किस व्यक्ति को किस भूमिका में देखना चाहते हैं। पूर्व नरेश ने कहा कि मौजूदा शासन व्यवस्था में नेापल की अर्थ व्यवस्था ढह चुकी है। आम नागरिक बेताहाशा मंहगायी से त्रस्त है और नेपाल विदेशी सहायता पर बुरी तरह निर्भर हो गया है। ऐसा माना जा रहा है कि इस प्रेस नोट के जरिये पूर्व नरेश ने मौजूदा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रहार किया है। उन्होंने उन लोगों में नेतृत्व की आस जगायी है जो फिर से राजशाही के लिए आंदोलनरत हैं। फिल्हाल नेपाल सरकार की तरफ से इस प्रेसनोट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।