One Rank One Pension को लेकर #Delhi में 'महासंग्राम', जानिए पूर्व सैनिकों द्वारा मांगी जाने वाली #OROP की पूरी ABCD

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (1 नवंबर): दिल्ली में वन रैंक-वन पेंशन (OROP) की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हरियाणा के एक पूर्व सैनिक ने मंगलवार शाम आत्महत्या कर ली। मरने वाले पूर्व सैनिक का नाम रामकिशन ग्रेवाल था जो हरियाणा में भिवानी के रहने वाले थे। परिवार वालों के मुताबिक रामकिशन OROP के मुद्दे पर सरकार के फैसले से नाखुश थे। जिसकी वजह से वे पिछले कई महीनों से OROP की मांग को लेकर  पूर्व सैनिकों के साथ जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे। जानकारी के मुताबिक मंगलवार दोपहर रामकिशन अपने साथियों के साथ अपनी मांगों को लेकर रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर से मिलने जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने जहर खा लिया। जिसके बाद उन्हें तुरंत राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। रामकिशन ने मरने से पहले सुसाइड नोट भी लिखा था और मरने से पहले उन्होने अपने बेटे को भी फोन पर जानकारी भी दी थी।

खुदकुशी पर शुरू हुई राजनीति

राहुल गांधी को रामकिशन के परिवार से मिलने से रोका गया... - पूर्व सैनिक की खुदकुशी पर राजनीति भी तेज हो गई है, विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। - आज पीडित परिवार से मिलने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को गेट पर ही रोक दिया गया। - जिसके बाद वे भड़क गए, उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कैसा देश बना दिया है जहां मैं पीडि़त परिवार से मिल भी नहीं सकता।

सीएम केजरीवाल ने पीएम मोदी पर साधा निशाना... - इससे पहले पूर्व सैनिक की खुदकुशी पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर पीएम मोदी पर साधा था निशाना। - केजरीवाल ने आज ट्वीट कर लिखा- मोदी के राज में किसान और जवान दोनों आत्महत्या कर रहे हैं।  - बहुत दुखद, सिपाही सरहद पर बाहरी दुश्मन से लड़ रहे हैं और देश में अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।

OROP पर मोदी सरकार का ऐलान...

- 5 सितंबर 2015 को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने OROP लागू करने का ऐलान किया था। - OROP का फायदा जुलाई 2014 से लागू किया गया और 2013 को आधारवर्ष निर्धारित किया। - रक्षा मंत्री के मुताबिक OROP लागू करने से 8000-10000 करोड़ रुपए खर्च होंगे। - जो सैनिक स्वेच्छा से रिटायरमेंट (VRS) लेते हैं उन्हें OROP नहीं मिलेगा। - इसमें युद्ध में घायल होने के कारण रिटायर होने वाले सैनिक शामिल नहीं किए गए। - साथ ही बढ़ी हुई पेंशन चार अर्धवार्षिक किस्तों में अदा की जाएगी। - सैनिकों की विधवाओं और 60 साल से ऊपर के सैनिको को बढ़ी हुई पेंशन एक किस्त में ही दी जाएगी। - रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए एक सदस्य न्यायिक आयोग गठित किया जाएगा।

पूर्व सैनिकों की क्या है मांग, किन मुद्दों पर अटकी है बात...

पेंशन समीक्षा- सरकार ने हर पांच साल पर पेंशन की समीक्षा की बात कही है, जबकि पूर्व सैनिक इसे हर दो साल पर करने की मांग कर रहे हैं।

आधार वर्ष- वन रैंक वन पेंशन की गणना के लिए 2013 के आधारवर्ष बनाया गया है और यह जुलाई 2014 से लागू होगा। जबकि पूर्व सैनिक ओआरओपी को अप्रैल 2014 से लागू करने की मांग कर रहे हैं।

न्यायिक आयोग- सरकार एक सदस्यीय न्यायिक आयोग के पक्ष में है, जबकि पूर्व सैनिक 5 सदस्यीय आयोग चाहते हैं, जिसमें उनके तीन प्रतिनिधि हों, जो एक माह में रिपोर्ट दे।

वीआरएस/पीएमआर- वीआरएस लेने वालों को ओआरओपी का लाभ नहीं मिलने की घोषणा से पूर्व सैनिक नाखुश दिखे। सरकार का तर्क है कि सेना में वीआरएस नहीं, प्री-मैच्योर रिटायरमेंट होता है।  इसके जबाव में पूर्व सैनिकों का कहना है कि ऐसा करना ठीक नहीं होगा क्योंकि सेना में 40 प्रतिशत सैनिक पहले ही सेना छोड़ देते हैं।

क्या है वन रैंक वन पेंशन...

- वन रैंक वन पेंशन का मतलब है कि एक ही रैंक से रिटायर होने वाले अफसरों को एक जैसी ही पेंशन मिले।  - पूर्व सैनिक पिछले करीब 40 साल से वन रैंक-वन पेंशन की मांग करते रहे हैं। - रिटायर होने वाले लोगों को उनके रिटायरमेंट के समय के नियमों के हिसाब से पेंशन मिलती थी।  - यानी जो लोग 25 साल पहले रिटायर हुए हैं उन्हें उस समय के हिसाब से पेंशन मिल रही है जो बहुत कम होती है। - 2006 छठां वेतन आयोग लागू होने के बाद 1996 से पहले रिटायर हुए सैनिक की पेंशन 1996 के बाद रिटायर हुए सैनिक से 82% कम हो गई।  - मान लीजिए 2006 से पहले रिटायर हुए मेजर जनरल की पेंशन 30,300 रुपए है, जबकि आज कोई कर्नल रिटायर होगा तो उसे 34,000 रुपए पेंशन मिलेगी।  - जबकि मेजर जनरल का रैंक कर्नल से दो रैंक ऊपर का होता है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद पेंशन कर्नल रैंक के अधिकारी को ज्यादा मिलती है। - मांग उठने की एक वजह यह भी है कि सैन्यकर्मी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में जल्दी रिटायर हो जाते हैं, इसलिए उनकी पेंशन स्कीम अलग हो। - केंद्र के नौकरशाह औसतन 33 साल तक सेवाएं देते हैं और अपनी आखिरी तनख्वाह की 50% पेंशन पाते हैं।  - सेना में सैनिक आमतौर पर 10 से 12 साल सर्विस करने के बाद रिटायर हो जाते हैं और सैलरी की 50% से कम पेंशन पाते हैं।

क्या है वन रैंक वन पेंशन का इतिहास...  - 1973 तक सेना में वन रैंक वन पेंशन थी। उन्हें आम लोगों से ज्यादा वेतन मिलता था। - 1973 में आए तीसरे वेतन आयोग ने सशस्त्र बलों का वेतन आम लोगों के बराबर कर दिया। - सितंबर 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को वन रैंक वन पेंशन पर आगे बढ़ने का आदेश दिया। - मई 2010 में सेना पर बनी स्थाई समिति ने वन रैंक वन पेंशन लागू करने की सिफारिश की। - सितंबर 2013 बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने प्रचार के दौरान वन रैंक वन पेंशन लागू करने का वादा किया। - फरवरी 2014 यूपीए सरकार ने इसे लागू करने का फैसला किया और 500 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया। - जुलाई 2014 मोदी सरकार ने बजट में वन रैंक वन पेंशन का मुद्दा उठाया और इसके लिए अलग से 1000 करोड़ रुपए रखने की बात की। - फरवरी 2015 सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तीन महीने के अंदर वन रैंक वन पेंशन लागू करने को कहा।

कितना खर्च होगा OROP लागू करने पर... - सरकार द्वारा घोषित ओआरओपी का आधार वर्ष 2013 है, और इसके क्रियान्वयन की तिथि पहली जुलाई, 2014 है।  - ओआरओपी योजना लागू होने पर राजस्व पर 8,000 से 10,000 करोड़ रुपयों का अनुमानित भार आएगा। - 12,000 करोड़ रुपये एरियर पर खर्च होंगे, ओआरओपी की बकाया राशि का भुगतान चार छमाही किश्तों में किया जाएगा।  - इस योजना के लागू होने से 25 लाख से अधिक पूर्वसैनिकों को लाभ मिलेगा, एरियर का भुगतान चार किश्तों में प्रत्येक छह माह पर किया जाएगा।  - शहीदों की पत्नियों और 60 वर्ष से अधिक आयु वाले पूर्व सैनिकों को भी एरियर एकमुश्त प्रदान की जाएगी। 

OROP पर PM मोदी ने क्या कहा... - 30 अक्टूबर को सेना और आईटीबीपी के जवानों के साथ दिवाली मनाने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था। - हमारी सरकार ने पूर्व सैनिकों को वन रैंक, वन पैंशन (OROP) का अपना वादा निभाया है। - इस वादे की पूर्ति के लिए पहली किश्त के रूप में 5500 करोड़ रुपये सरकार ने जारी कर दिए हैं।  - OROP का मुद्दा पिछले 40 सालों से लटका हुआ था, हमारी सरकार ने इसे प्राथमिकता में रखकर पूरा किया। - ओआरओपी कोई 200 या 500 करोड़ रुपये की बात नहीं थी, यह 10,000 रुपये करोड़ की बात थी।  - मैं प्रधानमंत्री बना तो मैंने इसे पूरा करने का प्रण लिया। - लेकिन सरकार के लिए संभव नहीं था कि वह एक बार में सारा पैसा चुका सके।  - इसलिए मैंने पूर्व सैनिकों से गुजारिश की वे चार किश्तों में इस पैसे को स्वीकार करें।  - चार किश्तों में यह पैसा उन तक पहुंचेगा और 5500 करोड़ पहली किश्त अदा की जा चुकी है।

OROP पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने क्या कहा... - रक्षा मंत्री ने 31 अक्टूबर को पणजी में कहा- OROP को लेकर पिछली सरकारों ने सिर्फ बातें कीं। - यह एनडीए की सरकार ही है, जिसने रक्षाकर्मियों के लिए वास्तव में OROP को लागू किया। - रक्षा मंत्री ने कहा करीब 20.69 लाख पूर्व सैनिकों को लाभ मिल रहा है। - सरकार ने अपना वचन निभाया है और वास्तव में पैसे दिए हैं।