ट्रैफिक जाम की वजह से हर साल होते हैं देश के हज़ारों करोड़ रुपये बर्बाद

नई दिल्ली(30 जुलाई): हमें एक और बात पर गौर करना चाहिए कि ट्रैफिक जाम में सिर्फ समय की ही बर्बादी नहीं होती है, बल्कि ट्रैफिक जाम के फ्रस्टरेशन से लोगों को गुस्सा आता है, जिसके बाद रोडरेज की घटनाएं बढ़ती हैं। ट्रैफिक जाम से लोगों का मूड और सेहत दोनों खराब होते हैं। बहुत सारे लोग ये नहीं जानते होंगे, कि ट्रैफिक जाम की वजह से देश के हज़ारों करोड़ रुपये भी बर्बाद हो जाते हैं।

हम आपको बताते हैं कैसे?

-IIM कोलकाता की एक स्टडी के मुताबिक देशभर में ट्रैफिक जाम से सालाना 60 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान होता है।

-यानी एक दिन में देश 164 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान ट्रैफिक जाम की वजह से झेलता है।

-जबकि प्रति वर्ष 47 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान इसलिए होता है क्योंकि ट्रकों से ले जाया जाने वाला सामान, वक्त पर अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाता है। यानी समय से डेलीवर नहीं हो पाता।

-IBM के एक सर्वे में 57% लोगों ने माना कि ट्रैफिक जाम की वजह से उनकी सेहत खराब हुई है।

-IBM की ही एक स्टडी बताती है कि सड़कों पर ट्रैफिक जाम में फंसने के बाद एक व्यक्ति की 40 प्रतिशत productivity यानी उत्पादकता खत्म  हो जाती है। यानी जाम में फंसने का असर आपके काम पर भी पड़ रहा है।

-देश की GDP विकास दर इस समय 7.6 फीसदी है। लेकिन अगर ट्रैफिक जाम से निजात मिल जाए तो ये विकास दर अपने आप बढ़ सकती है। ट्रैफिक जाम से आजादी मिलने से हर साल देश के 60 हज़ार करोड़ रुपये बचेंगे।

-इतनी रकम से देश में 2 करोड़ टॉयलेट बन सकते हैं। एक टॉयलेट पर मोदी सरकार ने 30 हज़ार रुपये का बजट रखा है।

-60 हज़ार करोड़ रुपये से देश में 200 बेड वाले 300 अस्पताल बन सकते हैं।

-60 हज़ार करोड़ रुपये से डेढ़ साल तक MNREGA का खर्च चलाया जा सकता है।

-60 हज़ार करोड़ रुपये से स्वच्छ भारत अभियान को 6 साल तक चलाया जा सकता है।

-2016-17 में सड़कों के लिए सरकार ने 27 हज़ार करोड़ रुपये जारी किये हैं। उस हिसाब से देखा जाए तो 60 हज़ार करोड़ रुपये से देश में सड़कों के निर्माण को दोगुनी रफ्तार दी जा सकती है।

-2016-17 में कृषि और किसानों की बेहतरी के लिए सरकार ने 35 हजार 984 करोड़ रुपये जारी किये। ऐसे में 60 हजार करोड़ रुपये की रकम डेढ़ साल तक किसानों की मदद कर सकती है।