यूरोपीय संसद के उपाध्यक्ष का बयान, चीन को नहीं था भारत की इतनी कड़ी प्रतिक्रिया का अंदाजा

नई दिल्ली (15 जुलाई):  डोकोलाम में पिछले चार हफ्ते से भारतीय और चीनी सेना आमने-सामने टेंट लगाकर डटे हुए हैं। भारत के इस कड़े तेवर से चीन ही नहीं पूरी दुनिय हैरान है। यूरोपीय संसद के उपाध्यक्ष रिसार्त जारनेतस्की के मुताबिक चीन को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं रहा होगा कि भूटान की क्षेत्रिय संप्रभुता की रक्षा के लिए डोकलाम के डोकला से जोम्पेलरी स्थित भूटान आर्मी कैंप की ओर सड़क बनाने के उसके कदम के खिलाफ भारत इतनी सख्त प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने ये बाते 'ईपी टुडे' पत्रिका में प्रकाशित अपने लेख में कही है।

जारनेत्सकी ने अपने इस लेख में बीजिंग के उस झूठ का भी पर्दाफाश किया है, जिसमें उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को विश्वास दिलाते हुए कहा था कि उसके 'शांतिपूर्ण उदय' किसी भी देश की स्थापित व्यवस्था के लिए खतरा नहीं बनेगा, बल्कि शांतिपूर्ण वैश्विक माहौल को प्रोत्साहित करेगा। हालांकि जारनेतस्की ने अपने लेख में साफ कहा कि चीन उस विदेश नीति को चल रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत मान्य नहीं है। उन्होंने डोकलाम को लेकर भारत और भूटान के साथ चीन के विवाद का जिक्र करते हुए लिखा है कि डोकलाम के डोकला से जोम्पेलरी स्थित भूटान आर्मी कैंप की ओर सड़क बनाने का एकतरफा फैसला उसकी गलत विदेश नीति का मुजाहेरा करता है।

उन्होंने लिखा है, 'विवादित डोकलाम क्षेत्र में चीन की निर्माण गतिविधियों का भूटान कूटनीतिक चैनलों के जरिये विरोध दर्ज कराया, जिसका चीन को संभवत: अंदाजा रहा होगा। हालांकि उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं रहा होगा कि भारत अपने पड़ोसी मुल्क भूटान की क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए इतनी मजबूती से खड़ा हो जाएगा।

आपको बता दें कि सिक्कम सीमा के पास स्थित डोकलाम को लेकर भारत तथा चीन के बीच गतिरोध को एक महीना बीत चुका है, जिसका अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। इस दौरान चीन की तरफ से लगातार उकसावे वाले बयान सामने आ रहे हैं, तो वहीं भारत कूटनीतिक रास्तों के जरिये इस मामले के शांतिपूर्ण समाधान की बात कर रहा है।