जीएसटी लागू होने के बाद बढ़ सकती है कई जरूरी दवाओं की कीमत

नई दिल्ली ( 14 जून ): जुलाई महीने से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स लागू हो जाने के बाद जरूरी दवाओं की कीमत 2.29 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। केंद्र सरकार ने ज्यादातर जरूरी दवाओं की कीमत पर 12 फीसदी जीएसटी रेट तय किया है। इन दवाओं पर टैक्स की मौजूदा दर तकरीबन 9 फीसदी है। हालांकि, इंसुलिन जैसी चुनिंदा दवाओं की कीमतों में गिरावट भी हो सकती है।


दरअसल, सरकार ने इस पर जीएसटी रेट को पहले के 12 फीसदी की प्रस्तावित दर से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। जरूरी दवाओं की नेशनल लिस्ट में हेपारिन, वारफारिन, डिल्टियाजेम, आइबूप्रोफेन आदि शामिल हैं।


ड्रग प्राइस रेग्युलेटर नेशनल फार्मासूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) पहले ही एक नोटिफिकेशन जारी कर चुका है। इस नोटिफिकेशन में उसने कहा है कि एमआरपी पर एक्साइज ड्यूटी लगने से तय दवाओं की कीमतों का आकलन मौजूदा अधिकतम कीमत पर 0.955905 फैक्टर लागू करने के बाद होगा। यह ऐप्लिकेबल जीएसटी रेट को छोड़कर होगा। एनपीपीए के मुताबिक, एक्साइज ड्यूटी से छूट पाने वाले शेड्यूल्ड फॉर्म्युलेशंज, उनकी मौजूदा एमआरपी और नोटिफाइड प्राइस की भी नई सीमा होगी।


इंसुलिन जैसी दवाओं के मामले में जहां जीएसटी रेट को प्रस्तावित 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है, तो कंपनियों को एमआरपी घटाने की जरूरत होगी। एनपीपीए का कहना है कि लोअर टैक्स रेट के कारण बचत के मामले में ऐंटी-प्रॉफिटियरिंग क्लॉज के तहत इसका फायदा कंज्यूमर्स तक पहुंचाया जा सकता है।