कर्मचारियों को बड़ी राहत, पीएफ योगदान घटाने का प्रस्ताव खारिज

नई दिल्ली ( 28 मई ): कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने श्रमिकों और नियोक्ताओं के लिए पीएफ में अनिवार्य योगदान को कम कर 10-10 प्रतिशत तक करने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। वर्तमान में कर्मचारी और नियोक्ता, एंप्लॉयी प्रॉविडेंट फंड स्कीम (ईपीएफ), एंप्लॉयी पेंशन स्कीम (ईपीएस) और एंप्लॉयी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (ईडीएलआई) के तहत मूल आय का 12-12 प्रतिशत राशि जमा करते हैं, जिसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कर्मचारी और नियोक्ताओं की यूनियनों के अलावा कई राज्य सरकारों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। ऐसे में विरोध को देखते हुए ईपीएफओ ने शनिवार को हुई बैठक में इस प्रस्ताव के खारिज कर दिया। इस प्रस्ताव के पीछे दलील दी जा रही थी कि इस कदम से कर्मचारियों के पास खर्च के लिए ज्यादा पैसे होंगे, जिससे नियोक्ता की जिम्मेदारी कम होगी और आखिर में यह अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा।

हालांकि, ट्रेड यूनियन ने यह कहते हुए इस प्रस्ताव का विरोध करने का फैसला किया था कि यह सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को कमजोर करेगा। वहीं यह भी दलील दी जा रही थी कि योगदान में कटौती से श्रमिकों के लिए लाभ चार प्रतिशत कम हो जाएगा। वर्तमान में नियोक्ता और कर्मचारी मूल वेतन का कुल 24 प्रतिशत रकम पीएफ में देते हैं। प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने पर यह घटकर 20 फीसदी रह जाती।

वर्तमान में कर्मचारियों का कुल 12 प्रतिशत योगदान उनके ईपीएफ खाते में जमा होता है जिसमें 3.67 प्रतिशत हिस्सा ईपीएफ खाते और मूल वेतन का 8.33 प्रतिशत ईपीएस खाते में जाता है। इसके अलावा, नियोक्ता कर्मचारियों के इंश्योरेंस के लिए ईडीएलआई में भी 0.5 प्रतिशत का योगदान देता है।