जानिए, क्या है पंजाब के चमत्कारी पानी की 'पहेली'

प्रीति रघुनंदन, नई दिल्ली (26 अप्रैल): पंजाब के फतेहगढ़ साहिब से एक खबर इन दिनों टीवी की दुनिया में छाई हुई है कि यहां के हैडपंप से निकलने वाला पानी चमत्कारी है और कई बीमारियां इससे दूर होती है, बीमारियां भी कोई ऐसी वैसी नही अस्थमा, शुगर,पैनक्रिया का इनफैक्शन और मोतियाबिंद की समस्या। 

ये खबर जंगल में आग की तरह पूरे पंजाब में फैल गई है और लोगों का पहुंचना यहां शुरू हो गया। पंजाब के इस चमत्कारी पानी की पहेली को समझने के लिए कुछ शोधकर्ताओ की एक टीम ने तो ये दावा भी कर दिया है कि अगर वाकई इस पानी से इतनी बड़ी बीमारियां दूर हो सकती है तो इसका परीक्षण हमारे सदस्यों पर किया जाए और अगर उनकी बीमारियां दूर हो जाती है तो हम पांच लाख का इनाम गांव के उन लोगों को देंगे, जो ये प्रचार कर रहे है कि पानी चमत्कारी है। पर कुछ लोगों का इस वाद-विवाद से कोई सरोकार नही है और ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जो ये पानी पी लेना चाहते है और अपनी बीमारियों को दूर कर लेना चाहते है ।

इसमें कोई दोराय नही की हमारा देश आस्था और परंपराओं का देश है लेकिन इन सबके बीच हमें ये भी सुनिश्चित करना होगा कि हम अंधविश्वास की जड़े समाज में ज्यादा मजबूत नहीं होने दें क्योंकि अंधविश्वास की वजह से लोगों के साथ धोखा होने का खतरा ज्यादा बन जाता है , हालांकि इस चमत्कारी पानी को लेकर एक्सपर्ट और धर्म गुरूओ की राय काफी अलग अलग है।

जहां एक्सपर्ट ये मान रहे है कि हैंड पम्प का पानी एक साधारण पानी है और ये भी हो सकता है कि इस पानी को पीने से कोई महामारी भी फैल जाए जिससे लोगों की दिक्कतें बढ़ जाऐं । धर्मगुरूओं का मानना हैं कि हमारा देश तो ऐसा देश है जहां गंगा को मां कह कर पुकारा जाता है गंगा के जल को पवित्र माना जाता है तो फिर इस बात की संभावना से इंकार नही किया जा सकता कि ये पानी भी चमत्कारी होगा। और इस पानी से लोगों का कल्याण हो रहा है।

ऐसे में हम इस चमत्कारी पानी को लेकर अपने विश्लेषण को आगे बढ़ाए उससे पहले आपको हाल कि एक घटना की भी याद दिला देते है ..उत्तरप्रदेश के हाथरस के गांव सिकंदरपुर में करीब महीनेभर पहले आस्था का मेला लगा था, अब इसे चमत्कार कहे या अंधविश्वास 20 साल से गांव में सूखे पड़े कुएं में अचानक आया पानी चमत्कारी हो गया । आलम ये था कि गांव के लोगों इस कुएं को किसी तीर्थ से कम नहीं मान रहे थे। लोग कुएं के पानी से नहाकर अपने रोगों को दूर कर रहे थे।

चमत्कार का यह हल्ला तब मचा जब गांव वाले बोले कि इस सूखे कुएं में खण्डित प्रतिमा डालने के बाद पानी फूट पड़ा। कुछ ही दिनों से इस चमत्कारी पानी की कहानी जंगल में लगी आग की तरह फ़ैल गई और सिकंदरपुर का कुआं भगवान बन गया। दूरदराज से लोग आ कर स्नान कर, पूजा पाठ कर रहे हैं। साथ ही लोग कुएं का पानी अपने साथ भी ले जा रहे थे।

गांव सिकंदरपुर में बना ये कुंआ सैंकड़ों साल पुराना है जो 20 साल सूखा पड़ा था। गांव वाले इसमें कचरा डालते थे, लेकिन कुछ दिन पहले गांव की एक महिला ने इस कुएं में राम, लक्ष्मण और सीता की खंडित प्रतिमा को डाल दिया। बाद में कुएं में जल स्रोत फूट पड़ा। ग्रामीणों की मानें तो खंडित प्रतिमाओं के डाले जाने के बाद कुएं में अचानक धुंआ उठने लगा और कुएं में साफ पानी आ गया। कुछ लोगों ने इस पानी से नहाया तो उनके चर्म रोग ठीक हो गए।

भूगोल जानकार इसे भूगर्भ की सामान्य प्रक्रिया मानते है। भूगर्भ के जलीय भंडार पर दबाव पड़ने से इसका विस्तार पास के एरिया में हो जाता है। वहीं भूगर्भ विशेषज्ञ मानते हैं कि भूगर्भ जल के पास गंधक का कोई ऐसा स्रोत हो सकता है, जोकि इस पानी से टकरा रहा है। आम तौर पर गंधक युक्त पानी को बीमारियों के लिए फायदेमंद कहा जाता है। कुएं में एकाएक पानी का स्तर बढ़ना भी कोई चमत्कार नहीं है। जानकारों का मानना है कि कुएं से करीब 100 मीटर दूर एक नहर है। इस नहर से पानी धरती के नीचे होकर कुएं का जल श्रोत बन गया है। इसीलिए अचानक पानी आ गया। और साथ ही विशेषज्ञों का तो यहां तक मानना है कि ये भी मुमकिन है कि इस पानी के ज्यादा सेवन से गंभीर बीमारियां भी हो सकती है ।

कुंए के चमत्कारी पानी की एक कहानी तो आपने जानी साथ ही ये भी कहना चाहेंगे कि पानी के चमत्कारी होने का अनुभव तो पूरी तौर पर आप पर निर्भर करता है लेकिन भारत वर्ष में आस्था के नाम पर कई पाखंडी अपनी दुकान चमका रहे है और आपकी आस्था के नाम पर कोई धोखा आपके या आपके अपने के साथ न हो जाए बस इस बात को सुनिॆश्चित जरूर करेँ। कही ये पानी भी हाथरत के कुंए के पानी की तरह ही धरती के अंदर होने वाली कोई प्रक्रिया का हिस्सा तो नही ये जरूर जानने की कोशिश करियेगा।