सर्जरी के लिए इंग्लैंड में नई मेडिकल पॉलिसी, मोटे लोग-स्मोकर्स के लिए नियम हुए कड़े

नई दिल्ली(2 दिसंबर): इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सिस्टम ने अपनी मेडिकल पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। मोटे लोगों और स्मोकर्स को अब अपना इलाज कराने के लिए सालभर लंबा इंतजार करना पड़ सकता है

- ऐसे लोगों को वेटिंग लिस्ट में सबसे आखिरी में रखा जाएगा। साथ ही सर्जरी कराने के लिए इन्हें कुछ नई शर्तों को मानना पड़ेगा।

- मोटे लोगों को 10 फीसदी वजन घटाना होगा। जबकि स्मोकर्स को कम से कम दो महीने के लिए सिगरेट छोड़नी पड़ेगी। इसके लिए बाकायदा छह महीने का प्रोग्राम भी चलाया जाएगा। ताकि वे अपने खानपान की आदतों में बदलाव कर सकें। 

- ऐसा सिर्फ नॉन अर्जेंट ऑपरेशन के मामले में किया जाएगा। यानी जहां सर्जरी जरूरी होगी, उस हालात में प्राइमरी आधार पर इनकी सर्जरी की जाएगी। 

- एनएचएस की ओर से किए जा रहे इस बदलाव का विरोध भी शुरू हो गया है।

- रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन के वाइस प्रेसिडेंट इयान का कहना है कि यह बहुत ही असंतोषजनक है। एनएचएस अपनी हदों को पार कर रहा है।

- यह स्कीम भेदभाव को बढ़ावा देती है। साथ ही नेचुरल जस्टिस के खिलाफ भी है। यह एनएचएस के संविधान का भी हनना है।

- दरअसल, इंग्लैड में जरूरी और नॉन अर्जेंट सर्जरी कराने वालों की लंबी वेटिंग है। लोगों को पांच महीने से एक साल तक इंतजार करना पड़ रहा है। 

- पहले यह वेटिंग दो साल तक लंबी थी। एनएचएस लीडर्स का कहना है कि ऐसा मरीजों को हेल्थ के प्रति प्रोत्साहित करने के मकसद से किया गया है।

- ज्यादातर बीमारी लाइफ स्टाइल से जुड़ी हैं। यदि इसमें बदलाव करके सर्जरी से बचा जा सकता है तो क्यों नहीं? लोगों की लाइफ स्टाइल में बदलाव कर उन्हें ठीक किया जा सकता है। 

- इससे मरीज क्लीनिकल ट्रीटमेंट से बच सकते हैं। न सिर्फ उनकी सेहत को फायदा मिलेगा बल्कि पैसे भी बचेंगे। दावा किया जा रहा है कि यह नया क्लिीनिकल सिस्टम सबसे बेस्ट प्रैक्टिस साबित होगी।

- हर साल करीब 65 हजार करोड़ रुपए लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारियों से जुड़े मरीजों पर खर्च कर रहा है।

- इसमें सबसे ज्यादा बीमारियों की वजह मोटापा और ध्रूमपान है। इसके बाद मधुमेह संबंधी मरीज सबसे ज्यादा हैं।

- इससे एनएचएस का वित्तीय सिस्टम बिगड़ता जा रहा है।