रिश्वत को सिर के पास रख सोता था इंजीनियर, वसूलने वाले थे 25 करोड़ रुपए

नई दिल्ली(20 जुलाई): जल विभाग के चीफ इंजीनियर आरके मीणा और एडिशनल चीफ इंजीनियर सुबोध जैन मंगलवार को 15 लाख रुपए की घूस लेते पकड़े गए। एक दिन पहले अधीक्षण अभियंता उदयभानु माहेश्वरी भी इसी मामले में 15 लाख की रिश्वत ले चुके थे, लेकिन वे एसीबी की कार्रवाई का पता लगते ही फरार हो गए। ये तो महज पहली किश्त बताई जा रही है। 250 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए ये इंजीनियर करीब 25 करोड़ की रिश्वत लेने वाले थे।  एसीबी की जांच में सामने आया कि आरोपी सुबोध जैन रिश्वत की राशि को अपने सिरहाने के नीचे रखकर सोता था। एसीबी ने उसके रूम में बेड के सिराने से गद्दे के नीचे से और अलमारी से 9 लाख रुपए बरामद किए है। यह राशि कंपनी के अधिकारियों से रिश्वत के रूप में ली गई थी। इससे पहले एसीबी की टीम ने जब एडिशनल चीफ इंजीनियर सुबोध जैन के घर पर दबिश दी और पैकेट बारे में पूछा तो उन्होंने कहा किकंपनी का प्रफुल्ल कुमार आया था और यह पैकेट भूल गया।

पैकेट खोलकर देखा तो उसमें एक-एक हजार रुपए की पांच गड्डी थी। इसके बाद सुबोध जैन ने एसीबी को बताया कि वह कंपनी द्वारा किए कार्यों का मेरे पास बिल पास कराने के लिए आया था। सुबोध जैन के घर पर दो आवासीय व एक कॉमर्शियल जमीनों के दस्तावेज मिले है। जिनकी कीमत करोड़ों रुपए में है। एसीबी जांच में सामने आया कि रिश्वत लेने के आरोपी चीफ इंजीनियर आरके मीणा व एडिशनल चीफ इंजीनियर सुबोध जैन विभाग के टैंडर जारी करने के लिए फर्म के मालिकों से 15 फीसदी तक कमीशन के रूप में रिश्वत लेते थे। वर्क ऑर्डर जारी करने की एवज में मंगलवार को लिए गए 15 लाख रुपए तो केवल बिल पास करनी की किश्त थी।

वैसे इन अफसरों को 1300 करोड़ के टर्नओवर वाली एसपीएमएल कंपनी से 250 करोड़ के प्रोजेक्ट के बदले 25 करोड़ रुपए तक वसूलने थे। एसीबी ने जल भवन से कंपनी व विभाग के दस्तावेज जब्त किए हैं। जिससे स्पष्ट है कि घूस की राशि किश्तों में ली जाती थी। एसीबी सूत्रों के अनुसार कंपनी को भरतपुर में पाइप लाइन डालने व संचालन व मेंटिनेंस का करीब 250 करोड रुपए का टेंडर मिलने वाला था। भरतपुर टेंडर के लिए कंपनी की ओर से चीफ इंजीनियर व एडिशनल चीफ इंजीनियर को 15 लाख रुपए की रिश्वत दी गई। इसके साथ ही 10 से 15 अन्य प्रोजेक्ट भी पाइप लाइन में चल रहे थे। एसपीएमएल कंपनी को राजस्थान में कुल छह सौ करोड रुपए के प्रोजेक्ट मिलने वाले थे।

इसके लिए जलदाय विभाग के कई अधिकारियों से कंपनी प्रतिनिधि की बातचीत हो रही थी। कंपनी के कई लोगों के फोन एसीबी ने फोन सर्विलांस पर लिया तो इसमें जलदाय विभाग की मंत्री किरण माहेश्वरी के ओएसडी और उनके एक नजदीकी का भी नाम सामने आया। चीफ इंजीनियर आर के मीणा को पकड़ने के बाद अलवर एसीबी की टीम को गुडगांव स्थित कंपनी के कार्यालय में सर्च के लिए भेजा गया।

एसीबी टीम गुडगांव के सुशांत लोक थाना पुलिस को लेकर कार्यालय पहुंची लेकिन इससे पहले ही राजस्थान का काम संभालने वाले ऋषभ सेठी फरार हो गए। कांग्रेस सरकार में मंत्री के ओएसडी रह चुके है जैन को हर समय मनचाही पोस्टिंग मिली।

जलदाय विभाग में इंजीनियरों की पोस्टिंग को लेकर पिछले एक साल से विवाद चल रहे है। आरके मीना को पिछले साल ही चीफ इंजीनियर पोस्ट पर प्रमोशन मिला था। मीना 1996-97 आरपीएससी बैच के एईएन है तथा उनका पिछले साल ही एसटी कोटे से चीफ इंजीनियर पोस्ट पर प्रमोशन हुआ था।

विभाग में तकनीकी रूप से भी उनके अनुभव कम होने के बावजूद विभाग में सबसे ज्यादा बजट की स्पेशल प्रोजेक्ट विंग के चीफ इंजीनियर पद पर लगा दिया। स्पेशल प्रोजेक्ट विंग में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट की लेटलतीफी व घटिया मेटेरियल पर पहले फर्मों व कंपनियों को नोटिस देकर पेमेंट अटका देते। जब मामले में बड़े कमीशन की बात होने पर खामियों के लिए विभाग के इंजीनियरों व सिस्टम को जिम्मेदार बताकर मामले को रफा-दफा कर देते। जो कंपनियां मिलीभगत करने को तैयार नहीं होती, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के लिए आला स्तर पर फाइल चला देते। यही चीफ इंजीनियर आरके मीना व माहिर एडिशनल चीफ इंजीनियर सुबोध जैन का पैसे वसूलने का तरीका था। जैन कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री के ओएसडी रह चुके है तथा मनचाही जगह पोस्टिंग ले लेते थे। पोस्टिंग, एलडी (पेनल्टी) माफ करने व पेमेंट करने के इस खेल की लपट आला अफसरों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।