पुलिस की ज्यादती के कारण इंजीनियर की मौत, डॉक्टर्स ने भी नहीं की मदद

इंदौर (8 जनवरी): मध्य प्रदेश के इंदौर में पुलिस की ज्यादती और अस्पतालों की लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसकी वजह से एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट की मौत हो गई। इंजीनियरिंग का ये होनहार स्टूडेंट अब इस दुनिया में नहीं है। सौरभ नाम के इस छात्र को इंदौर पुलिस की ज्यादती और दो नामी अस्पतालों की लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

वाकया 31 दिसंबर की रात का है। सौरभ को नए साल का बेसब्री से इंतजार था, वो बाइक से अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान विजय नगर इलाके में सौरभ की बाइक एक पुलिस अधिकारी की कार से टकरा गई। मौके पर पहुंचे पुलिस वालों ने सौरभ की जमकर पिटाई की। पिटाई से सौरभ गंभीर रुप से जख्मी हो गया।

हालत बिगड़ती देख विजयनगर पुलिस थाने के पुलिस वालों ने सौरभ को पहले एक निजी हॉस्पीटल लेकर गए। लेकिन निजी अस्पताल ने सौरभ का इलाज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस वाले सौरभ को लेकर एमवाय हॉस्पीटल पहुंचे, जहां पुलिस वालों ने सौरभ को भर्ती करा दिया, लेकिन इसके बाद जो हुआ वो आपके रोंगटे खड़े कर देगा।

भर्ती सौरभ का इलाज नहीं किया गया। 4 दिनों तक सौरभ इलाज के लिए तड़पता रहा। चौथे दिन सौरभ की हॉस्पीटल में ही मौत हो गई। यही नहीं सौरभ की लाश को लावारिश समझकर उसका पोस्टमार्टम कर दिया गया था। दरअसल जिन पुलिस वालों ने सौरभ को अस्पताल में भर्ती कराया था। उन्होने परिवार वालों को सौरभ की कोई सूचना नहीं दी थी।

दूसरी तरफ चार जब सौरभ अपने घर नहीं पहुंचा, तो परिजनों ने विजयनगर थाने जाकर जानकारी लेने की कोशिश भी की थी। लेकिन पुलिस वालों ने कोई भी जानकारी होने से इनकार कर दिया था। अब परिवार वाले दोषी पुलिस वालों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

पुलिसिया ज्यादती का शिकार हुए सौरभ के परिवार वालों ने डीआईजी के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। डीआईजी ने भी पुलिस वालों की गलती मानी है। एक एसआई, दो कॉन्सटेबलों को संस्पेंड कर दिया गया है।

अब पूरे मामले की जांच की बात कही जा रही है। दावा किया जा रहा है कि पूरी घटना के हर पहलू की जांच की जाएगी। लेकिन असली सवाल ये है कि सौरभ का क्या कसूर था। क्यों पुलिस वाले एक हादसे के बाद हैवान बन गए।