अब 'शत्रु' देश के नागरिक भारत में नहीं कर पाएंगे संपत्ति पर दावा !

नई दिल्ली (14 मार्च): अब 'शत्रु' देश के नागरिक भारत में अपनी संपत्ति पर दावा नहीं कर सकेंगे। सरकार ने आज लोकसभा में शत्रु संपत्ति संशोधन बिल को पास कर दिया।

शत्रु संपत्ति अध्यादेश को पहली बार सात जनवरी 2016 को लागू किया गया था। इसे नौ मार्च को लोकसभा ने पारित किया, लेकिन इसके बाद इसे राज्यसभा की समिति के पास भेजा गया। कोई भी अध्यादेश फिर तब जारी किया जाता है जब संसद सत्र नहीं चल रहा हो और इसकी जगह कोई विधेयक पारित नहीं किया जा सका हो। इस बिल को लेकर केन्द्र सरकार पांच बार अध्यादेश जारी कर चुकी है।

इस बिल में युद्ध के बाद पाकिस्तान और चीन पलायन कर गए लोगों की तरफ से छोड़ी गई संपत्ति पर उत्तराधिकार के दावों को रोकने के प्रावधान किए गए हैं।

‘शत्रु संपत्ति’ ऐसी कोई भी संपत्ति है जो किसी शत्रु या शत्रु कंपनी की है या उसका प्रबंधन उसकी ओर से किया जा रहा है। भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 के युद्ध के बाद 1968 में शत्रु संपत्ति कानून को लागू किया गया जो इस तरह की संपत्तियों का विनियमन करता है और इसके हकदारों की शक्तियों को सूचीबद्ध करता है।

भारत में 1968 में यह कानून लागू किया था जिसके तहत सरकार को अधिकार दिए गए थे कि वे अपने भारतीय नागरिकों की संपत्तियां जब्त कर सकती है जो युद्ध के दौरान चीन या पाकिस्तान चले गए थे। भारत ने इन संपत्तियों को 'दुश्मन की संपत्ति' का नाम दिया था।