कभी गूगल को खरीदने वाला था याहू, खुद ही बिक गया

नई दिल्ली(26 जुलाई):  काफी समय से आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रही इंटरनेट की दिग्गज कंपनी याहू अपना मुख्य कारोबार टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी वेराइजन को 5 अरब डॉलर में बेच चुकी है। एक समय शायद ही कोई सोच सकता था कि इंटरनेट के इस दिग्गज के कभी ऐसे दिन आएंगे। 1994 में शुरुआत के साथ ही तरक्की के रास्ते पर इसकी सरपट रफ्तार का आलम यह था कि 1998 आते-आते याहू और इंटरनेट एक दूसरे के पर्याय हो गए थे। दो बार गूगल को, एक बार फेसबुक को खरीदने के मौके गंवाने वाले याहू की क्या रही कहानी जानें यहां

कैसे हुई शुरुआत

1994 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के दो छात्र जेरी यांग और डेविड फिलो ने वर्ल्ड वाइड वेब (www) पर जेरीज गाइड बनाई और एक साल बाद इसे याहू नाम की कंपनी में बदला। याहू ने कमर्शल वेबसाइट लॉन्च की जिसमें न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के माध्यम से खबर और विज्ञापन चलते थे। कुछ ही सालों में इंटरनेट सर्फ करने वाले किसी भी व्यक्ति का पहला ठिकाना याहूडॉटकॉम हुआ करता था।

गूगल खरीदने का मौका गंवाया

जिस गूगल ने याहू को इतिहास बना दिया, कभी उसे खरीदने का ऑफर एक नहीं दो बार ठुकरा दिया। 1997 में याहू दस लाख डॉलर में गूगल को खरीद सकता था, लेकिन याहू ने यह कहकर यह मौका ठुकरा दिया कि वह नहीं चाहता कि लोग याहू से कहीं और जाएं। उस समय तक गूगल सिर्फ सर्च इंजन था जो कुछ ही सेकंड में सर्च रिजल्ट्स देकर यूजरों को उनके काम की वेबसाइट तक पहुंचाता था।

याहू चाहता था यूजर उसकी वेबसाइट पर ही रहें इसीलिए yahoo.com को डिजाइन भी ऐसे किया गया था। फिर भी 2002 में याहू इस गलती को सुधार सकता था। इस समय तक तो याहू अपने सर्च इंजन में भी गूगल की तकनीक का इस्तेमाल करने लगा था। तब याहू के सीईओ टेरी सेमेल को गूगल की 50 लाख डॉलर कीमत बहुत ज्यादा लगी थी। आज गूगल का मार्केट 522 अरब डॉलर से भी ज्यादा का है।