'अब बॉस की सैलरी तय करेंगे एम्प्लाइज़'

नई दिल्ली (30 जनवरी): आपकी तनख्वाह आपके बॉस तय करते हैं। सोचिए अगर आपको अपने बॉस का वेतन तय करने का अधिकार मिल जाए। ब्रिटेन में अब ऐसा ही होने वाला है। वहां की सरकार ने शीर्ष अधिकारियों के ज्यादा सैलरी पैकेज को देखते हुए ऐसा नियम लागू करने का फैसला किया है।

हाल में प्रधानमंत्री बनीं थेरेसा ने शीर्ष अधिकारियों की सैलरी पर अंकुश लगाने का वादा किया था। इस वादे के तहत फैसला लिया गया है। हालांकि, सरकार के इस कदम से मंत्रियों और बड़े कारोबारियों के बीच तनाव बढ़ सकता है। नए नियम के मुताबिक, सैलरी तय करने वाली कमिटी में कर्मचारियों के प्रतिनिधियों की सलाहकार की भूमिका होगी। उनको टॉप बॉस के सैलरी पैकेज पर राय देने का अधिकार होगा। वे यह राय देने की स्थिति में होंगे की सैलरी पैकेज में जबर्दस्त बढ़ोतरी का क्या असर पड़ेगा। किस हद तक इसका नेगेटिव असर कंपनी की रेप्यूटेशन और बाकी स्टाफ के मनोबल पर पड़ेगा।

निजी कंपनियों के बॉस के व्यवहार एवं पारदर्शिता पर एक नई आचार संहिता भी बनाई जाएगी। कमेटी व्यवहार पर नजर रखेगी। बहरहाल, यूके की 100 बड़ी कंपनियों में पिछले 18 साल में शीर्ष अधिकारियों की सैलरी में अपार बढ़ोतरी हुई है। साल 1998 में जिनका सैलरी पैकेज 10 लाख पौंड यानी करीब 8.5 करोड़ रुपये था वह 2015 में बढ़कर 43 लाख पौंड यानी करीब 35 करोड़ रुपये हो गया है। इस बीच इस सप्ताह कॉरपोरेट गवर्नेंस पर एक ग्रीन पेपर प्रकाशित होगा। इसमें कंपनियों को चीफ एग्जिक्यूटिव और औसत कर्मचारी के वेतन में अंतर को दिखाते हुए वेतन का अनुपात प्रकाशित करना होगा। कंपनियों को एग्जिक्यूटिव के सैलरी पैकेज पर शेयरधारकों की सालाना वोटिंग भी करानी होगी।

सरकार के एक सूत्र ने बताया कि गुड गवर्नेंस से कंपनियों के खुद के लॉन्ग टर्म फायदे और इकॉनमी की बेहतरी के लिए कंपनियों को बेहतर फैसले लेने में मदद मिलेगी। इससे ब्रिटेन में बिजनेस के प्रति लोगों में विश्वास बढ़ेगा। सरकार का मानना है कि वैश्वीकरण विरोधी और बिजनेस विरोधी भावनाओं के बढऩे के मद्देनजर पूंजीवाद की प्रतिष्ठा में सुधार के लिए बेईमान बॉसों पर शिकंजा कसने के लिए कदम उठाना जरूरी है।