37 साल बाद जिम्बाब्वे को मिला नया राष्ट्रपति

नई दिल्ली ( 25 नवंबर ): जिम्बाब्वे में हुई बड़ी राजनीतिक उठा पटक के बाद एमर्सन नांगगागवा ने देश के राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली।  जिसके साथ ही देश में राजनीतिक संकट का समाप्त हो गया। हाल तक रॉबर्ट मुगाबे के करीबियों में शुमार रहे नांगगागवा ने राजधानी हरारे के बाहरी इलाके में नेशनल स्पोर्ट्स स्टेडियम में अपने हजारों समर्थकों, गणमान्य अतिथियों और विदेशी राजनयिकों की गरिमामयी उपस्थिति में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।

शपथ लेने के बाद मनानगाग्वा ने जनता की भलाई का वादा किया। इस दौरान 37 साल तक देश चलाने वाले रॉबर्ट मुगाबे मौजूद नहीं थे। डियम और उसके ईद-गिर्द सुरक्षा का अचूक प्रबंध किया गया था। स्टेडियम में नांगगागवा के करीब 60 हजार समर्थक पहुंचे थे जो गाने पर झूम रहे थे। इस दक्षिण अफ्रीकी देश में 37 साल तक शासन करने वाले पूर्व राष्ट्रपति मुगाबे हाल ही में सैन्य हस्तक्षेप के बाद अपने पद से हटना पड़ा था। 

शपथग्रहण समारोह के लिए इकट्ठी हुई भीड़ को संबोधित करते हुए नांगगागवा ने कहा, 'हमारी आर्थिक नीति रोजगार, रोजगार, रोजगार पैदा करने के लिए होगी। उन्होंने कहा, हमें साथ मिलकर काम करना होगा। आप, मैं और हम सभी मिलकर इस राष्ट्र का निर्माण करेंगे।' 

इससे पहले एक नाटकीय घटनाक्रम के दौरान 1980 से देश की सत्ता संभाल रहे रॉबर्ट मुगाबे ने पद से इस्तीफा दिया। इस्तीफे से पहले मुगाबे ने मनानगाग्वा को बर्खास्त किया था। एमर्सन की बर्खास्तगी के बाद जिम्बाव्वे की सत्ताधारी पार्टी जानू-पीएफ और सेना ने मामले में दखल दिया। मुगाबे को नजरबंद सा कर दिया गया। संसद ने भी उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की। बढ़ते दबाव के बीच दुनिया के सबसे बुजुर्ग राष्ट्रप्रमुखों में शुमार मुगाबे को इस्तीफा देना पड़ा।