हाथियों के आतंक से पेड़ों पर रहने को मजबूर गांव बाले

नई दिल्ली (17 जनवरी): म्यांमार के रिमोट इलाकों में हाथियों का इतना आतंक है कि ग्रमीण जमीन छोड़ दरख्तों पर रहने को मजबूर हैं। यंगून से लगभग एक सौ किलोमीटर दूर थ्याकी में और आस-पास के इलाकों में समस्या ज्यादा है।

समझा जाता है कि जंगल काटे जान से हाथियों के रहने की जगह कम हो गयी है। जंगल काट कर बस्तियां बसा देने से हाथियों के व्यवहार में काफी परिवर्तन आ गया है। वो अक्सर भोजन के लिए लोगों की फसलों को रौंद डालते हैं, घरों को उखाड़ फेंकते हैं और अगर कोई उनके रास्ते में आ जाये तो वो उसको पैरों तले कुचल कर मार डालते हैं।

ख्यात शुयांग गांव के लोगों का कहना है कि पहले तो महीने एक-दो बार ही हाथियों का हमला होता था, लेकिन अब को हफ्ते में दो-तीन बार हमला करते हैं। हाथियों की चिंघाड़ और पैरों की धमक मिलते ही गांव वाले  उनकी नजर से बचने के लिए पेडों पर बने घरों में छिप जाते हैं।