धर्म और राजनीति को मिक्स नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली (20 अक्टूबर): धर्म और राजनीति को मिक्स नहीं किया जा सकता है, यह बात पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने कही। कोर्ट ने कहा कि धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगा जा सकता है और चुनावी लड़ाई के लिए धर्म का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में सात जजों की बेंच के सामने धर्म के नाम पर वोट मांगने से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि इस मामले में संसद ने पिछले 20 साल में कुछ नहीं किया है। चीफ जस्टिस ने कहा कि चुनावी लड़ाई के लिए धर्म का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। धर्म के आधार पर वोट नहीं मांगा जाना चाहिए। अगर चुनावी प्रक्रिया में धर्म को किसी भी तरह से इजाजत दी गई तो चुनाव से संबंधित कानून बेमतलब हो जाएगा।

अदालत ने कहा कि धर्म को परिभाषित करना कोर्ट के सामने मुद्दा नहीं है बल्कि हमारे सामने मुद्दा यह है कि क्या धर्म के नाम पर वोट मांगना जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत भ्रष्ट प्रैक्टिस माना जाएगा? इस दौरान अदालत ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि रेफरेंस 20 साल से पेंडिंग है, लेकिन संसद ने इस मामले में कुछ नहीं किया।