महिला भी हो सकती है घर की मुखिया, सभी फैसले लेने का होगा अधिकार-HC

नई दिल्ली (1 फरवरी): दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि घर में जो सबसे बड़ी बेटी होगी वहीं घर की 'कर्ता-धर्ता' होगी। कोर्ट ने कर्ता यानी मुखिया को लेकर कहा कि घर में हेड यानि मुखिया के न रहने पर जो घर में सबसे बड़ा होगा वहीं कर्ता होगा। फिर चाहे वो बेटी ही क्यों न हो।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार यह फैसला जस्टिस जानमी वजीरी ने सुनाया है। उनका यह फैसला दिल्ली के एक कारोबारी घर की बड़ी बेटी द्वारा किए केस के बाद आया है। उस परिवार की बड़ी बेटी ने अपने पिता और तीन चाचाओं की मौत के बाद मुकदमा दर्ज कराया था। उसने इसमें अपील की थी कि उसे घर का कर्ता घोषित किया जाए। क्योंकि पिता और तीन चाचाओं की मौत के बाद चचेरे भाई ने अपने आप को घर का कर्ता घोषित कर दिया था।

जस्टिस नाजमी वजीरी ने अपने फैसले में कहा कि जैसे पहले पैदा होने पर पुरुष मुखिया हो सकता है और कामकाज संभाल सकता है तो महिला भी इस काम को संभाल सकती है। उसे ऐसा करने से रोकने के लिए कोई कानून नहीं है। अपने फैसले में उन्होंने कहा कि ऐसे में महिला घर के सारे फैसले लेने की हकदार है। चाहे वो संपत्ति से संबंधित हो या फिर कोई जटिल मुद्दों को लेकर हो।

क्यों अहम है यह फैसला? 2005 में हिंदू सक्सेशन एक्ट में संशोधन कर धारा 6 जोड़ी गई थीष इसके जरिए महिलाओं को पैतृक संपत्ति में बराबर का हक दिया गया था. पर घर के फैसले करने का हक अब मिला। इसके बाद महिला अब हर बात पर अपनी बात कानूनी हक के साथ रख पाएगी।

यह फैसला उस सामाजिक बदलाव का प्रतीक है जहां अब तक पुरुष ही परिवार का मुखिया रहता आता है। चाहे वो घर में छोटा ही क्यों न हो। जब बेटी पिता को बेटे की तरह कंधा दे सकती है तो फिर पिता के रूप में वो सारे काम कर सकती है जो एक पिता करता है।

'आत्मनिर्भरता की मिसाल है औरत' फैसला सुनाते वक्त जस्टिस वजीरी ने कहा कि आजकल की महिलाएं हर क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं और आत्मनिर्भता की मिसाल हैं। 1956 का पुराना कानून 2005 में ही बदल चुका है। अब जब कानून बराबरी का हक देता है तो अदालतों को भी ऐसे मामलों में सतर्कता बरतते हुए फैसला करना चाहिए।