इस देश में 'मिसकैरिज' के लिए महिलाओं को दी जाती है 40 साल जेल की सज़ा

नई दिल्ली (28 मई): मध्य अमेरिका में स्थित एल सेल्वाडोर एक ऐसा देश है, जो प्रजनन संबंधी अधिकारों के लिए अभी भी काफी रुढ़िवादी कानूनों के लिए जाना जाता है। यहां की रहने वाली वाली मारिया टेरेसा रिवेरा नाम की महिला को अकाल गर्भपात (मिसकैरिज) के अपराध के लिए 40 साल की सजा दी गई थी। हालांकि, इस महीने की शुरुआत में एक ऐसा फैसला आया जिसने दुनिया भर के कार्यकर्ताओं के लिए एक राहत की सांस दी। 

ब्रिटिश अखबार 'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, मारिया पर गर्भपात कराने और हत्या करने के आरोप लगे थे। लेकिन इस मामले को जज ने इस आधार पर फैसले को पलट दिया कि इसके लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। करीब 5 साल भीड़भरी जेल में बिताने के बाद आखिरकार वह अपने बेटे ऑस्कर से मिल पाई। जेल में रहने के दौरान वह कभी भी परिवार के सदस्यों से नहीं मिली थी।

अपने बेटे को गले लगाने के बाद उसने कहा, "मैं खुश हूं कि मैं अपने बेटे के साथ हूं। लेकिन मुझे डर है क्योंकि जो हुआ है, उसके लिए पूरा समाज इसके लिए तैयार नहीं होगा।"  

33 वर्षीय मारिया के मामले ने कार्यकर्ताओं का ध्यान उस सच्चाई की तरफ खींचा है क्योंकि उन्होंने इसे महिलाओं के शरीर पर नियंत्रण से लड़ाई के तौर पर उजागर किया जा रहा है।

लैटिन अमेरिकी राष्ट्र में करीब 60 लाख लोग रहते हैं। यह एक ऐसा देश है जहां गर्भपात हर परिस्थिति में गैरकानूनी है। लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि कोई भी देश एल सैल्वाडोर की तुलना में इतने आक्रामक तौर पर कानूनों को लागू नहीं करता।

1998 से पहले गर्भपात की मंजूरी बलात्कार, पारिवारिक व्यभिचार के मामलों में थी। अगर भ्रूण घायल होता या महिला की जान खतरे में होती। लेकिन इसी साल धार्मिक कट्टरपंथियों के दबाव में आकर कानून में बदलाव किया गया। साथ ही सभी अपवादों को हटा दिया गया। ऐसा अनुमान है कि 1998 से 2013 के बीच में 600 से ज्यादा महिलाओं को जेल में डाला गया है। इन सभी पर गर्भपात का आरोप है। इसी कानून के तहत मारिया को 40 साल जेल की सज़ा दी गई थी।