हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- ब्वायफ्रेंड से ब्रेकअप पर पढ़ी-लिखी लड़कियां न रोएं रेप का रोना

नई दिल्ली ( 22 जनवरी ): रेप के एक मामले पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि शादी के लिए किए गए वादे को बलात्कार के हर मामले में प्रलोभन नहीं माना जा सकता। बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह फैसला 21 साल के लड़के के प्री-अरेस्ट बेल (गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत) पर सुनवाई करते हुए दिया।

लड़की ने बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप होने के बाद लड़के के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज कराई थी। जस्टिस मृदुला भटकर ने कहा कि एक पढ़ी-लिखी (शिक्षित) लड़की जो कि शादी से पहले यौन संबंध बनाती है, उसे अपने फैसले की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई धोखा देकर सहमति प्राप्त करता है, तो उसे प्रलोभन का एक हिस्सा माना जाता है। प्रथम दृष्टया यह मानने के लिए कुछ सबूत तो होने चाहिए कि लड़की को इस हद तक झांसा दिया गया है कि वह शारीरिक संबंध बनाने के लिए राजी हो गई। जस्टिस भटकर ने कहा कि इस तरह के मामलों में शादी के वादे को प्रलोभन नहीं माना जा सकता।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक हाई कोर्ट ने कहा कि हालांकि समाज बदल रहा है, फिर भी उस पर नैतिका भारी है। यह नैतिकता के तहत है कि शादी के समय तक वर्जिन रहना महिला की जिम्मेदारी है। हालांकि, आज की यंग जेनरेशन एक-दूसरे से कई तरह से इंट्रेक्ट होती है और उन्हें सेक्सुअल एक्टिविटीज के बारे में अच्छे से जानकारी होती है। समाज उदार होने की कोशिश कर रहा है लेकिन जब शादी से पहले सेक्स का सवाल आता है तो नैतिकता के विभिन्न धाराणओं में निंदा की बात है। ऐसी परिस्थितियों जब एक महिला किसी लड़के के प्यार में होती है तो वह भूल जाती है सेक्स करने में उसकी मर्जी भी शामिल थी, लेकिन बाद में वह अपने फैसले के जिम्मेदारी लेने से पीछे हटने लगती है।

कोर्ट ने इस ओर भी ध्यान दिलाया है कि आज कल संबंध खत्म होने के बाद रेप के आरोप लगाने का ट्रेंड बढ़ रहा है। ऐसे में कोर्ट को निष्पक्ष नजरिए से मामले को सुनना होता है, क्योंकि उसमें आरोपी का अधिकार और जीवन भी शामिल है और पीड़ित लड़की का दर्द भी शामिल है। कोर्ट ने अपने पिछले आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि अगर महिला व्यस्क और शिक्षित है तो उसे शादी से पहले संबंध बनाने का अंजाम पता होना चाहिए।