आर्थिक सर्वे 2017: ये हैं 10 बड़ी बातें...

नई दिल्ली (31 जनवरी): वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सदन के पटल पर आर्थिक सर्वे पेश किया। हालांकि इसमें सरकार ने भी माना है कि नोटबंदी के बाद जीडीपी की रफ्तार धीमी होगी, लेकिन यह भी कहा गया है कि फिर भी भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होगी।

आर्थिक सर्वे 2017 की यह रहीं 10 बड़ी बातें...

1. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में इकनॉमिक सर्वे पेश किया। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि अगले वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की किसी अन्य अर्थव्यवस्था के मुकाबले तेजी से वृद्धि करेगी।

2. आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 6.75% से 7.5% की दर से आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया गया है। वैश्विक स्तर पर मांग में उछाल से वित्त वर्ष 2017-18 में तेज आर्थिक वृद्धि होगी। नोटबंदी का वृद्धि दर पर 0.25 से 0.50 प्रतिशत का असर होगा, लेकिन दीर्घावधि में इससे लाभ होगा। जीएसटी तथा अन्य बुनियादी सुधारों से वृद्धि दर 8 से 10 प्रतिशत पर पहुंचेगी। जीएसटी से वित्तीय लाभ मिलने में समय लगेगा।

3. मौजूदा वित्त वर्ष 2016-17 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर 6.5 प्रतिशत पर आएगी। पिछले वित्त वर्ष में यह 7.6 प्रतिशत रही थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई औसतन 5 प्रतिशत पर ठहरी हुई है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना तथा कच्चे तेल की निचली कीमतों से राजकोषीय मोर्चे पर अप्रत्याशित लाभ होगा।

4. सर्वे में आर्थिक गतिशीलता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की वकालत की गई है। यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) डेटा पर गंभीरता से विचार की जरूरत बताई गई है। सब्सिडी खत्म करने के विकल्प के तौर पर यूबीआई को पेश किया जा सकता है।

5. आर्थिक सर्वे में अर्थव्यवस्था के विकास की राह में तीन बड़े खतरों का जिक्र किया गया है। नोटबंदी से कृषि क्षेत्र पर कैश की कमी का असर दिखेगा। क्रूड कीमतों में उछाल जीडीपी के लिए बड़ा खतरा। वित्त वर्ष 2017-18 में क्रूड में गिरावट का फायदा मिलना बंद हो जाएगा। क्रूड के दाम में उछाल की वजह से रिजर्व बैंक से रेट कट की उम्मीद खत्म हो गई।

6. व्यक्तिगत आयकर की दरों, जमीन जायदाद पर स्टाम्प (पंजीकरण) शुल्क में कटौती की सिफारिश। ऊंची आमदनी वाले सभी व्यक्तियों को धीरे-धीरे आयकर दायरे में लाकर आयकर का दायरा बढ़ाने का सुझाव। कॉर्पोरेट कर की दरों में कटौती की रफ्तार तेज हो। मनमर्जी पर रोक तथा जवाबदेही बढ़ाने के लिए टैक्स ऐडमिनिस्ट्रेशन में सुधार किया जाएगा। नए नोटों की आपूर्ति बढ़ने से वृद्धि दर सामान्य होगी।

7. इकनॉमिक सर्वे में तीन सेक्टर्स फर्टिलाइजर, सिविल एविएशन, बैंकिंग के निजीकरण की जरूरत बताई गई। सरकार ने सिफारिश मानी तो कृभको, एयर इंडिया, पवन हंस जैसी कंपनियों का प्राइवेटाइजेशन हो सकता है।

8. वित्त वर्ष 2016-17 में सेवा क्षेत्र में 8.9%, औद्योगिक क्षेत्र में 5.2% की दर से वृद्धि का अनुमान जताया गया है। पिछले वित्त वर्ष में इंडस्ट्री सेक्टर ने 7.4% की दर से वृद्धि दर्ज की थी। मौजूदा वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र के 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले यह 1.2 प्रतिशत ज्यादा है।

9. इकनॉमिक सर्वे में श्रम और कर नीतियों में बदलाव की सिफारिश की गई है ताकि परिधान और चमड़ा क्षेत्र को बढ़ावा मिले और ये दोनों विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लायक बन सकें।

10. सर्वे में सेंट्रलाइज्ड पब्लिकर सेक्टर ऐसेट रीअबिलिटेशन एजेंसी की स्थापना की सिफारिश की गई है।