गिरेंगे संपत्ति के दाम, गरीबों को मिल सकेंगे मकान

नई दिल्ली (31 जनवरी): राष्‍ट्रपति के अभिभाषण के बाद वित्त मंत्री ने अर्थिव सर्वे पेश किया, जिसमें कहा गया है कि नोटबंदी से जीडीपी वृद्धि दर पर पड़ रहा प्रतिकूल असर अस्‍थायी ही रहेगा। वित्‍त मंत्री ने संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2017 में कहा कि मार्च 2017 के आखिर तक नकदी की आपूर्ति के सामान्‍य स्‍तर पर पहुंच जाने की संभावना है, जिसके बाद अर्थव्‍यवस्‍था में फिर से सामान्‍य स्थिति बहाल हो जाएगी। अत: वर्ष 2017-18 में जीडीपी वृद्धि दर 6.75 प्रतिशत से लेकर 7.5 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है।

आर्थिक सर्वेक्षण में इस ओर ध्‍यान दिलाया गया है कि नोटबंदी के अल्‍पकालिक एवं दीर्घकालिक प्रतिकूल असर और लाभ दोनों ही होंगे। नोटबंदी से पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों में नकद राशि की आपूर्ति में कमी और इसके फलस्‍वरूप जीडीपी वृद्धि में अस्‍थायी कमी शामिल है, जबकि इसके फायदों में डिजिटलीकरण में वृद्धि, अपेक्षाकृत ज्‍यादा कर अनुपालन और अचल संपत्ति की कीमतों में कमी शामिल हैं, जिससे आगे चलकर कर राजस्‍व के संग्रह और जीडीपी दर दोनों में ही वृद्धि होने की संभावना है।

नोटबंदी से डिजिटलीकरण ने पकड़ी तेज रफ्तार...

नोटबंदी से होने वाले फायदों के संदर्भ में शुरुआती साक्ष्‍य से यह पता चला है कि नोटबंदी के बाद डिजिटलीकरण ने तेज रफ्तार पकड़ी है। जहां तक नोटबंदी से पड़ने वाले प्रतिकूल असर का सवाल है, इस वजह से चलन में आई नकदी में तेज‍ गिरावट देखने को मिली। हालांकि यह आमतौर पर लगाए गए अनुमान से बेहद कम रही। नवंबर महीने में यह कमी 62 प्रतिशत रही, जबकि दिसंबर में सुधरकर 35 प्रतिशत के शिखर पर पहुंच गई।

घट सकती है जीडीपी...

8 नवंबर के बाद के हफ्तों में लेन-देन के लिए ज्‍यादा मूल्‍य वाले पुराने नोटों का उपयोग जारी रहने से ही यह स्थिति देखने को मिली। इसके अलावा नकदी की किल्‍लत अप्रैल 2017 तक समाप्‍त हो जाएगी। इस बीच, नकदी के संकट का काफी प्रतिकूल असर जीडीपी पर पड़ेगा, जिसके चलते 7 प्रतिशत की आधार रेखा के मुकाबले वर्ष 2016-17 में जीडीपी वृद्धि दर 0.25 प्रतिशत से लेकर 0.5 प्रतिशत तक घट जाएगी।

आठ प्रमुख शहरों में संपत्ति की कीमतों में होगी गिरावट...

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि आठ प्रमुख शहरों में अचल संपत्ति की पहले से घट रही कीमत 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा के बाद और ज्‍यादा घट गई। अचल संपत्ति की कीमतों में कमी अपेक्षित है, क्‍योंकि इससे मध्‍यम वर्ग के लिए किफायती मकानों का मार्ग प्रशस्‍त होगा और देश भर में कामगारों की आवाजाही बढ़ेगी, जो फिलहाल बेहद ज्‍यादा एवं गैर-किफायती किरायों के कारण प्रभावित हो रही है।