आर्थिक सर्वेक्षण में मोदी सरकार ने दिया जलवायु परिवर्तन पर जोर

नई दिल्ली (29 जनवरी): वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने संसद के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 प्रस्‍तुत किया। इसमें उन्होंने सतत विकास, ऊर्जा व जलवायु परिवर्तन प्रखंड, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।

यह सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों से स्पष्ट होता है। पेरिस घोषणा पत्र में उत्सर्जन स्तर को 2030 तक 2005 के स्तर का 33-35 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। समानता और सहभागी सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए भारत ने जलवायु परिवर्तन के खतरे की जवाबी कार्रवाई प्रणाली को सशक्त बनाया है।

सतत विकास के संदर्भ में सर्वेक्षण कहता है कि भारत की शहरी जनसंख्या 2031 तक 600 मिलियन हो जाएगी। शहरी स्थानीय निकाय नगर पालिका बॉन्ड, सार्वजनिक निजी समझौता तथा क्रेडिट जोखिम गारंटी जैसे वित्तीय व्यवस्थाओं के माध्यम से संसाधन निर्माण करते हैं।

सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आधार है- सतत, आधुनिक और सस्ती ऊर्जा। 30 नवंबर, 2017 तक कुल ऊर्जा क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा 18 प्रतिशत था और यह पिछले 10 वर्षों में तीन गुणा बढ़ा है।

जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता के संदर्भ में सर्वेक्षण ने 8 वैश्विक प्रौद्योगिकी निगरानी समूहों के गठन का उल्लेख किया है। इससे जलवायु परिवर्तन कार्य योजना जो 2014 में शुरू हुई थी, को 2017-18 से 2019-20 तक का विस्तार दिया गया है। इसके लिए 132.4 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। राष्ट्रीय अनुकूलन कोष को भी 31 मार्च, 2020 तक विस्तार दिया गया है। इसके लिए 364 करोड़ रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है।