जीएसटी: कीमत बढ़ाने वाले रेस्ट्रॉन्ट्स पर कसेगा शिकंजा!

नई दिल्ली(18 नवंबर): जीएसटी दरों में कटौती के बाद रेस्ट्रॉन्ट्स कीमतें बढ़ाने का जुगाड़ निकाल चुकी हैं। लेकिन उनका ये जुगाड़ ज्यादा दिन तक टिकने वाला नहीं है। सरकार मामले को गंभीरता से ले रही और इसपर कार्रवाई करने पर विचार कर रही है

- हालांकि रेस्ट्रॉन्ट्स लागत बढ़ने पर कीमत बढ़ाने को आजाद हैं, लेकिन ज्यादातर रेस्ट्रॉन्ट्स का कहना है कि कीमतों में हालिया वृद्धि टैक्स दर 18% से घटाकर 5% करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट खत्म किए जाने के जीएसटी काउंसिल के फैसले की वजह से की गई।

- वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'अगर इनपुट टैक्स क्रेडिट खत्म होने की वजह से कीमतें इतनी बढ़ गई हैं तो जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद इसी अनुपात में दाम घटने भी चाहिए थे। यह ऐंटी-प्रॉफिटिअरिंग ऐक्शन (मुनाफखोरी के विरुद्ध कार्रवाई) का बिल्कुल उचित मामला है।'

- अधिकारी ने कहा कि कानून में सरकार को शिकायतों पर कार्रवाई करने के साथ-साथ स्वतः संज्ञान लेने की भी अनुमति मिली हुई है। अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर सूत्र ने कहा, 'मुनाफाखोरी का मामला साबित हो गया तो हम उनपर अधिकतम संभावित जुर्माना लगाएंगे।'

- मैकॉनल्ड्स और स्टारबक्स से लेकर डॉमिनोज पिज्जा तक, कई फूड चेन्स बेस प्राइस बढ़ा चुकी हैं जबकि केएफसी जैसी चेन्स अगले हफ्ते दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। संगठित क्षेत्र के पक्षकार नैशनल रेस्ट्रॉन्ट्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) का अनुमान है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट खत्म किए जाने से मेन्यु प्राइसेज में 6 से 7 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इसके उलट उसने सरकार से कहा कि जीएसटी से महज 1% रेस्ट्रॉन्ट्स को ही फायदा हुआ था।

- दूसरे असोशिएसंस ने जीएसटी काउंसिल के फैसलों का स्वागत किया है, लेकिन एनआरएआई मेंबर्स इसे चुनौती देने का मन बना चुकी हैं। इससे सरकार और असोसिएशन के बीच की लड़ाई तेज होने की संभावना है। गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऐंटीप्रॉफिटिअरिंग बॉडी की स्थापना का ऐलान करते हुए ग्राहकों से जीएसटी लागू होने का फायदा नहीं मिलने पर आवाज उठाने की अपील की थी।

- वित्त मंत्रालय ने जुलाई से मेन्यु प्राइस में कटौती के जरिए जीएसटी का फायदा ग्राहकों को नहीं देने की जानकारी पाकर रेस्ट्रॉन्ट्स को इनपुट पर उपलब्ध टैक्स क्रेडिट नहीं देने का फैसला किया। दरअसल, सरकार इस स्कीम को लागू करने में मुश्किलों का सामना कर रही थी। इसलिए, उसने राज्यों को इनपुट टैक्स क्रेडिट्स खत्म करने के लिए मना लिया।