खाने की बर्बादी रोकेगी सरकार- ना करो अन्न बर्बाद, ताकि देश में कोई भूखे पेट न सोए

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (12 अप्रैल): 'साईं इतना दीजिये, जा में कुटुम समाय। मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाय' संत कबीर का यह दोहा आज के दौर में कितना प्रासंगिक है यह ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट पर नजर डालें तो पता चलेगा। पिछले एक दशक में भारत में गरीबी का स्तर का कम जरूर हुआ है लेकिन स्थिति अब भी गंभीर है। तेजी से महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर भारत में तकरीबन 19 करोड़ लोग आज भी भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। दो जून की रोटी के लिए आज भी कई लोग मोहताज हैं। शायद यही कारण है कि मोदी सरकार जल्द यह तय कर सकती है कि एक शख्स को एक थाली में कितना खाना परोसा जाए ताकि अन्न की बर्बादी ना हो और जरूरमंदों को पेटभर भोजन मिल सके। इसके लिए सरकार बड़े होटल और रेस्तरां में परोसी जाने वाली डिशेज का साइज तय करने पर विचार कर रही है। दरअसल अभी तमाम होटल फुल प्लेट चीजें ही देते हैं। अक्सर ग्राहक पूरी चीजें खा नहीं पाते और अन्न की बर्बादी होती है। इसी को रोकने के लिए सरकार यह कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इससे एक तो होटलों में खाने की बर्बादी कम होगी और दूसरा लोगों की जेब पर कम बोझ पड़ेगा जितना खाएंगे उनता ही चुकाएंगे।


ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2016 की रिपोर्ट- वैश्विक थिंक टैंक इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IFPRI) के सर्वे में यह बात सामने आई है। IFPRI में हाल ही में ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2016 की रिपोर्ट जारी की है। जिसमें भारत का स्थान 118 देशों में 97वें स्थान पर है। पिछले साल भारत 104 देशों में 80वें स्थान पर था। ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2016 में भारत नेपाल(72), श्रीलंका(84) और बांग्लादेश(90 से पीछे लेकिन पाकिस्तान(107) से आगे है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 1990 से अभी तक भुखमरी 39 प्रतिशत कम हो गई है। साथ ही भारत ने 1990 से अब तक स्थिति को बेहतर किया और खतरनाक श्रेणी से बाहर आ गया है लेकिन स्थिति अब भी गंभीर है।


भारत में अन्न की बर्बादी के आंकड़े...

    * 40 प्रतिशत फल-सब्जियां और 20 प्रतिशत अनाज खराब सप्लाई चेन के कारण बर्बाद हो जाता है।

    * इन अनाज, दालें, फल, सब्जियों का बाजार मूल्य 50 हजार करोड़ रुपए है।

    * भारत में हर साल 23 करोड़ दाल, 12 करोड़ टन फल और 21 करोड़ टन सब्जियां खराब हो जाती हैं।

    * ब्रिटेन में जितना अन्न पैदा होता है, उससे कहीं अधिक हमारे देश में होता है बर्बाद।

    * वहीं विश्व खाद्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, दुनिया भर में प्रतिदिन 20,000 बच्चे भूखे रहने को मजबूर हैं।

    * एक वर्ष में भारत का प्रति व्यƒक्ति 6-11 किलो भोजन बर्बाद करता है, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 95-115 किलो है।

    * दिल्ली में मिडिल क्लास फैमिली खाने-पीने की चीजों पर एक महीने में 15 हजार रुपये खर्च करती है।

    * इसमें से हर महीने 750 रुपये का सामान किसी न किसी तरह वेस्ट हो जाता है।

    * देश की 34 करोड़ 47 लाख आबादी गरीबी रेखा के नीचे हो, वहां भूख से लड़ना किसी महामारी से लड़ने जैसा हो जाता है।

    * भारत का मामला है विवाह, पार्टियों और दूसरे सामाजिक-निजी आयोजनों में 15 से 20 प्रतिशत खाना बर्बाद हो जाता है।

    * इसमें मीट की बर्बादी मात्र 4 फीसदी है, लेकिन इससे आर्थिक नुकसान 20 फीसदी का है।

    * हर साल भारत में उतना गेहूं बर्बाद होता है,जितना ऑस्ट्रेलिया की सालाना पैदावार है।

    * इससे कृषि लाभ में 50 हजार करोड़ का नुकसान होता है और इससे 30 करोड़ लोगों के भोजन की भरपाई हो सकती है।


यूनाइटेड नेशन्स एन्वॉयरमेंट प्रोग्राम की रिपोर्ट, दुनियाभर में अन्न की बर्बादी के आंकड़े...

    * दुनिया भर में 33 फ़ीसदी खाना (करीब 1300 करोड़ क्विंटल) बर्बाद हो जाता है, जिसकी कुल क़ीमत 750 अरब डॉलर यानी 46 लाख करोड़ है।

    * दुनिया भर में क़रीब 84 करोड़ लोगों को खाना नहीं नसीब होता, यानी दुनिया में हर 8वां व्यक्ति भूखे पेट सोता है।

    * विकासशील देशों में 63 करोड़ टन और औद्योगिक देशों में 67 करोड़ टन खाने की बर्बादी होती है।

    * अफ्रीका महाद्वीप में हर साल करीब 23 करोड़ टन भोजन का उत्पादन होता है, जबकि अमीर देशों में 22.2 करोड़ टन खाना बर्बाद हो जाता है।

    * एशियाई देशों चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में हर साल प्रतिव्‍यक्ति करीब 100 किग्रा सब्‍जी और 80 किग्रा चावल बर्बाद हो रहा है।

    * चीन के लोग हर वर्ष 32.6 अरब डॉलर का खाना बर्बाद कर देते हैं। इस खाने से करीब 20 करोड़ लोगों का पेट भर सकता है।

    * विश्व भोजन बर्बादी में 3.3 अरब टन ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं, जिसमें मीथेन सर्वाधिक ज्यादा निकलती है, जो ओजोन परतों के लिए सबसे खतरनाक है।


कैसे रोकें अन्न की बर्बादी...

    * जब आप किसी पार्टी या समारोह में जाते हैं, तो सिर्फ उतना ही खाना अपनी प्लेट में डालें, जितना आप खा सकें।

    * ऑफिस की कैंटीन या रेस्टोरेंट में उतना ही खाना आर्डर करें, जितना आप खा सकें।

    * कई बार दिखावे के चक्कर में हम ज्यादा खाना मंगाते हैं और बाद में छोड़ देते हैं, जो कूड़े में जाता है।

    * बच्चों के लंच बॉक्स में भी उतना ही खाना दें, जितना वो खा सकें और अपने बच्चे को भी खाने की बर्बादी के बारे में जागरूक करें।

    * उतना ही खाना पकाएं, जितनी ज़रूरत हो। अगर खाना बच जाता है, तो उसे फेंकने के बजाय अच्छे से फ्रिज में स्टोर करके अगले दिन इस्तेमाल कर लें।