जब सोने की चि‍ड़‍िया था भारत, आगरा से भी 7 गुना छोटा था लंदन

नई दिल्ली (14 अगस्त): जब अंगरेजों ने भारत में कदम रखा, उस वक्त आगरा की जनसंख्या 7 लाख के करीब थी और तब का लंदन आगरा से 7 गुना छोटा था। वो वक्त था जब भारत में ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी ने पैर रखे। जो निशान ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत की ज़मीन पर छोड़े वो आज तक मिटे नहीं हैं।

सोने की चिड़िया था भारत... - ये वो वक्त था जब भारत को पूरी दुनिया में सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। - पूरी दुनिया का एक चौथाई उत्पादन भारत में ही होता था जबकि ग्लोबल जीडीपी में ब्रिटेन का योगदान सिर्फ 2 फीसदी ही था। - कुछ वक्त पहले ऑक्सफर्ड यूनियन सोसाइटी में अंग्रेज़ों के बीच ही पूर्व विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर ने अंग्रेज़ों को याद दिलाया था कि आखिर ब्रिटेन ने भारत को कितना लूटा। - मुगल बादशाह जहांगीर के समय आगरा की जनसंख्या 7 लाख के करीब थी और तब का लंदन आगरा से 7 गुना छोटा था। - सिर्फ़ लंदन ही नहीं बल्कि यूरोप के कई देश आगरा के सामने बौने ही नज़र आते थे। - वहीं अगर पेरिस, लिस्बन, मैड्रिड और रोम को मिला दिया जाए, उससे भी बड़ा तब का लाहौर था। - अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि भारत कितना संपन्न राष्ट्र था। - तब ईस्ट इंडिया कंपनी इतनी छोटी थी कि ये लंदन में गवर्नर के घर से चलती थी, जिसमें सिर्फ 6 स्टाफ थे।

- हालांकि लंदन की थेम्स नदी पर इसके खुद के 30 बड़े जहाज़ और खुद का डॉकयार्ड था। - ऐसे वक्त में ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में व्यापार शुरू किया था।

ऐसे बना चेन्नई... - सन 1640 के मार्च के महीने में ईस्ट इंडिया कंपनी को बड़ी सफलता हाथ लगी। - कंपनी ने विजयनगर शासकों के प्रतिनिधि चन्द्रगिरि के राजा से आधुनिक चेन्नई नगर की जगह हासिल कर ली, जहां पर अंग्रेज़ों ने सेंट जॉर्ज किले का निर्माण किया। - ईस्ट इंडिया कंपनी काउंसिल के सदस्य फ्रांसिस डे ने 1640 में चोलमंडल तट पर इस किले को बनाया था। - इसी किले के चारों ओर आधुनिक मद्रास नगर का विकास हुआ, जिसे अब चेन्नई के नाम से जाना जाता है। - फ़्रांसिस-डे के नाम पर ही इस क़िले का नाम 'फ़ोर्ट सेण्ट जॉर्ज' पड़ा था। - अंग्रेज़ों ने बाद में मसुलीपट्टम की जगह इसको अपना हेडक्वार्टर बनाया और बाद में इसे मद्रास प्रेसीडेंसी की राजधानी बनाया गया।

ब्रिटेन को दहेज में मिला टापू... - ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय ने पुर्तगाल के राजा की बहन कैथरीन ऑफ ब्रेगैंज़ा से शादी कर ली। - दहेज में ब्रिटेन को बंबई का टापू मिल गया, बाद में चार्ल्स द्वितीय ने सिर्फ 10 पाउंड सालाना किराए पर ये टापू ईस्ट इंडिया कंपनी को दे दिया। - शुरुआत में बंबई टापू की सम्पत्ति न के बराबर थी। इसने पश्चिमी तट पर ईस्ट इंडिया कंपनी को पैर जमाने में बहुत मदद की।

- फिर 1669 से 1677 के बीच कंपनी के गवर्नर जेराल्ड आंगियर ने आधुनिक बंबई शहर की नींव डाली।

ऐसे हुई कलकत्ता शहर की स्थापना... - ईस्ट इंडिया कंपनी के वफादर जॉब चारनाक ने बंगाल के नवाब इब्राहिम खान के बुलावे पर सूतानाती गांव में कलकत्ता शहर की स्थापना की। - बाद में इसमें कालिकाता और गोविंदपुर को भी जोड़ दिया गया। - फिर 90 साल के अंदर देश के 3 बड़े बंदरगाहों बंबई, मद्रास और कलकत्ता पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना अधिकार स्थापित कर लिया। - ये तीनों बन्दरग़ाह प्रेसीडेंसी कहलाए और इनमें से हर एक का प्रशासन ईस्ट इण्डिया कम्पनी के 'कोर्ट ऑफ़ प्रोपराइटर्स' द्वारा नियुक्त एक गवर्नर के सुपुर्द किया गया। - बाद में बंगाल के नवाब इब्राहिम खान ने सिर्फ 3 हज़ार रुपए में ईस्ट इंडिया कंपनी को सालाना सीमा शुल्क से भी मुक्त कर दिया।