ऐसे 100 सालों में अंगरेजों ने कब्जाया था हिंदुस्तान

नई दिल्ली (14 अगस्त): भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी अचानक ही स्थापित नहीं हुई। इसमें 100 साल से भी ज़्यादा का वक्त लगा। इस दौरान उसे फ्रांस और डच कंपनियों के साथ भारतीयों से भी कई युद्ध करने पड़े। ये ईस्ट इंडिया कंपनी की ही किस्मत थी कि हिंदुस्तान पर सल्तनत का दावा करने वाली मुग़ल बादशाहत धीरे-धीरे कमज़ोर होती गई। 18वीं शताब्दी के दौरान देश कई छोटे-छोटे मुस्लिम और हिंदू राज्यों में बंट गया।

इन राज्यों में कोई भी एकता नहीं थी। मुस्लिम न सिर्फ हिंदू राज्यों के ख़िलाफ थे बल्कि उनमें आपस में भी एकता नहीं थी और न ही उनके मन में दिल्ली में राज करने वाले मुगल बादशाह के लिए कोई निष्ठा थी। भारतीयों के बीच यही फूट ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए वरदान साबित हुई।

साल 1757...

- अंग्रेज़ और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला की सेनाएं मुर्शिदाबाद में प्लासी नाम के गांव में आमने-सामने आ गईं। - सिराज़ुद्दौला की सेना में शामिल मीरज़ाफर ने विश्वासघात किया, जिससे सिराज़ुद्दौला की हार हुई। - इस जीत के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी काफी मज़बूत हो गई। - बंगाल अंग्रेज़ों के अधीन हो गया और मीरज़ाफर को बंगाल का नवाब बनाया गया।

साल 1764...

- मुगल शासक शुजाउद्दौला, शाह आलम और मीरकासिम तीनों की सेनाएं पटना में डेरा डाले हुए थी। - तीनों का एक साथ सामना बक्सर के युद्ध में हुआ, मेजर मुनरो की अंग्रेज़ों सेना ने तीनों को हरा दिया। - इस जीत के साथ ही बंगाल के बाद बिहार में भी अंग्रेज़ी हुकूमत ने पैर जमा लिए। - नतीजा ये हुआ कि भारत के एक हिस्से पर ब्रिटिश राज स्थापित होने लगा।

साल 1799...

- मैसूर की कमान टीपू सुल्तान के हाथ में थी। मैसूर की तीसरी लड़ाई में जब अंग्रेज़ टीपू सुल्तान को नहीं हरा पाए तो उन्होंने मैसूर के इस शेर से 'मंगलोर की संधि' नाम से एक समझौता कर लिया। - फूट डालो, शासन करो' की नीति चलाने वाले अंग्रेज़ों ने संधि करने के बाद टीपू से गद्दारी कर डाली। - ईस्ट इंडिया कंपनी ने हैदराबाद के साथ मिलकर चौथी बार टीपू पर ज़बर्दस्त हमला किया और आख़िरकार 4 मई सन् 1799 ई. को मैसूर का शेर श्रीरंगपट्टनम की रक्षा करते हुए शहीद हो गया। - इसके साथ ही भारतीय राजनीति पर अंग्रेज़ों ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली। - इसके बाद 1803 में अंग्रेज़ों ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया। - 1838 तक देश की रियासतों को जीतने के साथ ही असम को भी अपने कब्ज़े में ले लिया। - साल 1849 में अंग्रेज़ों ने पंजाब पर भी कब्ज़ा कर लिया। - इसके बाद अंग्रेज़ों ने सतारा, संभलपुर, जैतपुर, उदयपुर, झांसी, नागपुर, इलाहाबाद, हैदराबाद पर भी कब्ज़ा जमा लिया।

ये भारत में लॉर्ड डलहौजी का शासनकाल था, जिसे अर्ल ऑफ डलहौजी भी कहा जाता था। जो गवर्नर जनरल बनकर भारत आया था और इस तरह जो कंपनी भारत में सिर्फ व्यापार करने आई थी। उसने पूरे भारत पर कब्ज़ा कर लिया था।