भूकंप से कांपे पूर्वी भारत के 8 राज्य, म्यांमार में था केंद्र... जानिए, क्यों बार बार आते हैं भूकंप?

नई दिल्ली (24 अगस्त): भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों, पश्चिम बंगाल और बिहार में शाम 4:05 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। USGS(यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे)के मुताबिक रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6.8 मापी गई है। भूकंप का केंद्र पड़ोसी देश म्यांमार में जमीन के 91 किलोमीटर नीचे बताया जा रहा है। 

भूकंप इतना तेज था कि इसके झटके बंगाल, बिहार, झारखंड, असम और उड़ीसा तक महसूस किए गए। कोलकाता, रांची, पटना और गुवाहाटी में भूकंप के बाद लोग घरों से बाहर निकल आए। पश्चिम बंगाल के मालदा, वीरभूम, जलपाईगुड़ी और मिदनापुर में इसका ज्यादा प्रभाव दिखा।

भूकंप के झटके महसूस किए जाने के बाद लोग अपने घरों और दफ्तरों से डर की वजह से बाहर निकल आए। लोगों का कहना है कि उन्‍होंने करीब 10 सेकेंड तक भूकंप के झटके महसूस किए। इसके चलते कोलकाता में कुछ देर के लिए मेट्रो सेवा रोक दी गई थी। झारखंड की रजाधानी रांची समेत अन्‍य हिस्‍सों में भी ये झटके महसूस किए गए।

भूकंप में हताहत हुए लोगों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। आशंका जताई जा रही है कि म्यांमार में जानमाल की बड़ी हानि हुई है। गौरतलब है कि मंगलवार को दिल्ली में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इससे पहले इटली में कल आधी रात आए भूकंप में कई शहर तबाह हो गए हैं और मरने वालों की संख्या कम से कम 38 हो गई है।

क्यों आता है भूकंप...

पृथ्वी की बाह्य परत में अचानक हलचल से उत्पन्न ऊर्जा के परिणाम स्वरूप भूकंप आता है। यह ऊर्जा पृथ्वी की सतह पर, भूकंपी तरंगें उत्पन्न करती है, जो भूमि को हिलाकर या विस्थापित कर के प्रकट होती है।

भूकंप के कारण- भूकंप प्राकृतिक घटना या मानवजनित कारणों से हो सकता है। अक्सर भूकंप भूगर्भीय दोषों के कारण आते हैं। भारी मात्रा में गैस प्रवास, पृथ्वी के भीतर मुख्यत: गहरी मीथेन, ज्वालामुखी, भूस्खलन, और नाभिकीय परिक्षण ऐसे मुख्य दोष हैं।

कैसे मापा जाता है भूकंप- भूकंप का रिकार्ड एक सिस्मोमीटर के साथ रखा जाता है, जो सिस्मोग्राफ भी कहलाता है। भूकंप का क्षण परिमाण पारंपरिक रूप से मापा जाता है, या संबंधित और अप्रचलित रिक्टर परिमाण लिया जाता है। 3 या कम परिमाण की रिक्टर तीव्रता का भूकंप अक्सर इम्परसेप्टीबल होता है और 7 रिक्टर की तीव्रता का भूकंप बड़े क्षेत्रों में गंभीर क्षति का कारण होता है। झटकों की तीव्रता का मापन विकसित मरकैली पैमाने पर किया जाता है।

क्या होता है प्रभाव- भूकंप से जान, माल की हानि, मूलभूत आवश्यकताओं की कमी होती है। इमारतों व बांध, पुल, नाभिकीय ऊर्जा केंद्र को नुकसान पहुंचता है। भूस्खलन व हिम स्खलन होता है, जो पहाड़ी व पर्वतीय इलाकों में क्षति का कारण हो सकता है। विद्युत लाइन के टूट जाने से आग लग सकती है। समुद्र के भीतर भूकंप से सुनामी आ सकता है। भूकंप से क्षतिग्रस्त बांध के कारण बाढ़ आ सकती है।

भूकंप के वक्त क्या करें... - भूकंप के समय बिना घबराए नहीं सुरक्षित स्थान तक पहुंचें, हड़बड़ाहट घातक साबित होती है।  - घर के अंदर हैं तो ऊपर से गिर सकने वाले भारी सामान से दूरी बनाए रखें।  - कमरे के किसी भी कोने में या दरवाजे की चौखट के नीचे शरण लें। - झटके बंद होते ही खुले व सुरक्षित स्थान की तरफ जाएं।  - घर के बाहर हैं, तो इमारतों, पेड़ों, खंभों व बिजली की तारों से दूर खुले स्थान में जाएं।  - वाहन में हों तो वाहन रोक लें और अंदर ही रहें।

क्या करें तैयारी... - भूकंप अवरोधी तकनीक के मकान बनाएं, इससे खर्च नाममात्र ही बढ़ेगा, लेकिन भूकंप से सुरक्षा बहुत अधिक मिलेगी।  - घर में एक सुनिश्चित स्थान पर हर समय फर्स्ट एड किट, टार्च, रेडियो व कई दिन तक खाया जा सकने वाला खाना रखें, यह आपदा में काम आएगा।  - भूकंप के समय बाहरी मदद पहुंचने में देर लग सकती है, इसलिए सांसें चलती रखने के लिए हड़बड़ाहट न करें, इससे एनर्जी खत्म होगी। -समय-समय पर आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण लें व पूर्वाभ्यास करें। -आपदा की किट बनाएं जिसमें रेडियो, जरूरी कागज, मोबाइल, टार्च, माचिस, मोमबत्ती, चप्पल, कुछ रुपये व जरूरी दवाएं रखें।

ये हैं भारत में आए बड़े भूकंप... 26 अप्रैल 2015- नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप से भारत में 66 लोगों की मौत हुई। 18 सितंबर 2011- भारत के सिक्किम में 6.8 की तीव्रता वाली भूकंप आयी,इसमे 100 से ज्यादा लोग मारे गए और हज़ारों लोग घायल हुए। 26 दिसंबर 2004- भूकंप के कारण उत्पन्न सूनामी लहरों ने एशिया में हजारों लोगों की जान ले ली थी, इस भूकंप की तीव्रता 8.9 मापी गई थी। 26 जनवरी 2001- गुजरात में 7.9 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया। इसमें 30 हजार लोग मारे गए और करीब 10 लाख लोग बेघर हो गए।  मार्च 1999- भारत के उत्तर काशी और चमोली में दो भूकंप आए और इनमें 100 से अधिक लोग मारे गए। 1993 में लातूर में आए भूकंप में 9,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। 1934 में बिहार में आए भूकंप में 30,000 लोग मारे गए थे। 1905 में हिमाचल के कांगड़ा में आए भूंकप में 20,000 लोग मार गए थे।