खत्म हो जाएगी दुनिया, वैज्ञानिकों ने बताई ये बड़ी वजह

नई दिल्ली ( 1 अगस्त ): वैज्ञानिकों ने सोमवार को कहा कि दुनिया भर के तापमान में इस सदी में 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि होने की संभावना है। एक नए शोध के मुताबिक, दुनिया ऐसे पड़ाव पर पहुंच जाएगी जब जलवायु परिवर्तन के खतरनाक और विनाशक नतीजों को रोक पाना संभव नहीं रह जाएगा। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन ने अपने इस शोध में पाया कि कार्बन गैसों के उत्सर्जन को घटाने की चाहे कितनी भी कोशिश कर ली जाए, लेकिन 90 प्रतिशत संभावना यही है कि इस सदी के अंत तक दुनिया का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़कर 4.9 सेल्सियस हो जाएगा।

धरती पर कारखानों के लगने और औद्योगिक क्रांति होने से पहले के तापमान के मुकाबले यह 2 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके बाद से ही धरती को जलवायु परिवर्तन के बेहद घातक परिणामों से बचा पाना असंभव हो जाएगा। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सूखा आएगा, तापमान में बहुत ज्यादा तब्दीलियां नजर आएंगी और समुद्र का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती के तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की यह वृद्धि वह मोड़ होगी, जिसके बाद फिर कभी पीछे लौटना मुमकिन नहीं हो सकेगा। इसके बाद धरती के हालातों को सुधारने की कोशिश संभव नहीं रह जाएगी। 

पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट में दुनियाभर के देशों ने धरती के तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मकसद में नाकामयाब होना लगभग तय है। शोध के मुताबिक, इस बात की 99 फीसद संभावना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण धरती के तापमान की वृद्धि का रिकॉर्ड पेरिस डील में तय की गई अधिकतम सीमा को पार कर जाएगा। इस शोध में शामिल वैज्ञानिकों ने धरती की जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े पिछले 50 सालों के आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद यह भविष्यवाणी की है।